एक दशक पुरानी पापा की लिखी यह कविता किन घटनाक्रमों से उपजी थी वह स्पष्ट याद है! हमारी सोसाइटी जहाँ हम रहते थे, वहां की कुछ बातों से असहज हो कर लिखी गयी कविता आज पढ़ते हुए पुनः यह बात पुष्ट होती हुई लगती है कि लिख जाने के बाद देश काल परिस्थिति से परे हो जाती है कविता... ऐसा न होता तो आज इसे पढ़ते हुए ये कविता मुझे और भी कई सन्दर्भों में, वर्तमान परिपेक्ष्य में यूँ प्रासंगिक नहीं लगती...
लड़ाई मिथ्याभिमान की नासमझी की अंध स्वार्थ की हो जहाँ...
हो जहां समाज में- किंकर्तव्यविमूढ़ता...
प्रबुद्ध जन हों जहां-- मूक, विचलित, भयभीत...
वहां हो कोई नीतिज्ञ भी - तो क्या कर पाएगा?
जहां पड़ी हो कूप मे ही भंग- वहां यथार्थ या सत्यार्थ को भी- कौन समझा पाएगा?
दम्भी दम्भ भरता हुआ भी- दम्भ क्या है, समझ नहीं पाता है... नाम भले सम्राट अशोक हो-- पर जग को शोकमग्न बनाता है...
सुनते हैं नरसंहार के बाद वह बिलकुल बदल गया था,
शान्ति का संवाहक हो गया था।
पर आज साहस नहीं लोग अपनी गलती भी स्वीकारें- अपनी भूल को सुधारें...
ये हैं परम शातीर, रचते स्वांग कि वे तो भोले और निराले हैं--
पर लोग तो समझ ही लेते हैं दोहरे चरित्र को...
जीता वह घूटन में ही है!
और स्पष्टवादी किसी की बिना किये परवाह सब कुछ यहां रख देता है-- धाराप्रवाह! धाराप्रवाह!
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (05-08-2017) को "लड़ाई अभिमान की" (चर्चा अंक 2687) पर भी होगी। -- सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। -- चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है। जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये। हार्दिक शुभकामनाओं के साथ। सादर...! डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
2 टिप्पणियाँ:
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (05-08-2017) को "लड़ाई अभिमान की" (चर्चा अंक 2687) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
सटीक प्रस्तुति
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