बस एक क्षण ठहर, ज़िन्दगी!

जब शब्दों से ज्यादा
उनके बीच का
मौन बोलता हो...
जीवन का रहस्य
जब मन में
बेचैनी घोलता हो,
कोई एक भाषा मन की
तब मन में ही
मुखर होती है...
कह नहीं सकते
किसके प्रताप से
किसकी ज्योत प्रखर होती है! 


परस्पर होते हैं
कुछ आदर स्नेह के प्रतिमान...
कुछ भाव
एक से होते हैं,
मिलता है संबल
जाने कहाँ से दृगों को...
कुछ मन को छू जाता है
और हम नयन भिगोंते हैं!


नम आँखों से
फिर एक प्रार्थना
महकती है...
ईश्वर सी ही
कोई अनन्य छवि
झलकती है,
और घुटनों पर बैठी आत्मा
हाथ जोड़े
लीन हो जाती है
प्रार्थना में शब्द नहीं होते
कहते हैं,
शब्दों से प्रार्थना क्षीण हो जाती है! 


वो सब सुनता है
मौन भी शब्द भी...
प्रभु की कृपा करती है
हमें भावविभोर भी और स्तब्ध भी,
उसकी लीला
वो ही जाने...
इंसान हैं हम
बस भावों से ही जाएँ पहचाने!



इतना ही परिचय हो अपना
इतनी ही हो
अपनी बिसात...
आज सुबह सुनहरी दी है प्रभु!
ऐसे ही देना
कल का भी प्रभात,
शब्द बोले
और दो शब्द के बीच का
मौन भी बोले...
बस एक क्षण
ठहर, ज़िन्दगी!
हम ख़ुशी ख़ुशी आज रो लें... ... ... !!



13 टिप्पणियाँ:

ANULATA RAJ NAIR 4 अक्टूबर 2013 को 2:18 pm बजे  

वाह......
ज़रूर ठहरेगी ज़िन्दगी तुम्हारे लिए.....
बहुत सुन्दर.......

अनु

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया 4 अक्टूबर 2013 को 2:32 pm बजे  

जो पली हो दर्द -दवारा, जिन्दगी है i
भाग्य का टूटा सितारा ,जिन्दगी है i
मीत के असहाय बिछुड़ने की सजा ,
सिर्फ यादों का सहारा , जिन्दगी है i

RECENT POST : पाँच दोहे,

Suresh Chandra (SC) 4 अक्टूबर 2013 को 5:05 pm बजे  

और घुटनों पर बैठी आत्मा
हाथ जोड़े
लीन हो जाती है
प्रार्थना में शब्द नहीं होते
कहते हैं,
शब्दों से प्रार्थना क्षीण हो जाती है !!

कालीपद "प्रसाद" 4 अक्टूबर 2013 को 5:06 pm बजे  

बहुत सुन्दर अहसास कि अभिव्यक्ति !
नवीनतम पोस्ट मिट्टी का खिलौना !
नई पोस्ट साधू या शैतान

Dr ajay yadav 4 अक्टूबर 2013 को 5:29 pm बजे  

मौन में हमारा सम्बन्ध सीधे हृदय से होंता हैं |

Dr. sandhya tiwari 4 अक्टूबर 2013 को 5:44 pm बजे  

vaah............he prabhu ham sabhi par kriya banye rakhna , shbdon ko kahi rok ham bhi prarthna me lin hai..........

Saurabh 4 अक्टूबर 2013 को 10:11 pm बजे  

बहुत दिनों बाद सुना कुछ. अच्छा लगा सुनना.

ओंकारनाथ मिश्र 4 अक्टूबर 2013 को 11:51 pm बजे  

....और इतने गहरे आत्मचिंतन के बाद ही ऐसी रचना का निर्माण होता है.

कौशल लाल 5 अक्टूबर 2013 को 2:55 am बजे  

शब्द बोले
और दो शब्द के बीच का
मौन भी बोले.......सुन्दर चिंतन

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून 5 अक्टूबर 2013 को 6:22 am बजे  

"A friend is someone whom one can be silent with." कभी कहीं पढ़ा था.

Yashwant R. B. Mathur 5 अक्टूबर 2013 को 11:36 am बजे  

कल 06/10/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद!

asha sharma dohroo 7 अक्टूबर 2013 को 2:37 am बजे  

सुंदर रचना एक क्षण ही काफी है

प्रवीण पाण्डेय 11 अक्टूबर 2013 को 9:04 am बजे  

बस ईश्वर, निज मन में रखना।

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