अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

परिचय के मोती...!

कई रातें जगे हुए बीतीं हैं
तुम्हारी कविताओं के साथ
कई हजार शब्द तुम्हारे
मेरे मन में उमड़ते घुमड़ते रहते हैं 


कितने ही आंसू साथ रोये हैं हम 


झांकना कभी बीते समय में फुर्सत से
तो जगमगा उठेंगे वो आंसू 


सच है अनायास ही होते हैं
कुछ प्रयास...
हम देख नहीं पायेंगे कभी
पूर्व निर्धारित घटनाक्रमों का आकाश... 


ये समय ही है जो हमें जोड़ता है,
फिर हमारा जुड़ाव समयातीत हो जाता है!
उबड़ खाबड़ जीवन की राहों में कोई विरला ऐसा होता है
जो हमारे लिए गीत हो जाता है!! 


मेरे मन में थी कहीं की कोई एक तीव्र प्रेरणा
जो त्वरित तुमसे जोड़ गयी 


और तेरी विराट नज़रों का रूख मेरी ओर मोड़ गयी 


ईश्वरीय सा कुछ जब यूँ घट जाता है
जीवन के प्रति स्नेह और प्रगाढ़ हो जाता है 


ये परिचय के मोती...
ये भावों के रजकण जरा चुन लें हम,
कहती रहे वाणी और भावविभोर सुन लें हम... ... ... !!

*****


आवाज़ को तरसते हुए जब कोई आवाज़ मिल जाए कहीं तो शब्द फिर मिलते नहीं...! बिन शब्दों के लिखते रहे, फिर प्रेरणा ने हाथ पकड़ कर लिखवाये शब्द और कहा- जोड़ कर सहेज लो, यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव की सुगंध तो इन पन्नों में होनी ही चाहिए...! सो बस ऐसे ही लिख गयी कविता... एक बहुत पुराने अनन्य मित्र के लिए. मित्रता शायद सदियों पुरानी हो, बीच में विस्मृत हो चली थी... फिर मिल गयी और अपने पूरे प्रताप के साथ खिल गयी! 

19 टिप्पणियाँ:

रविकर 1 अक्तूबर 2013 को 12:45 pm  

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

Darshan jangra 1 अक्तूबर 2013 को 12:49 pm  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - बुधवार - 2/10/2013 को
जो जनता के लिए लिखेगा, वही इतिहास में बना रहेगा- हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः28 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra


sushma 'आहुति' 1 अक्तूबर 2013 को 2:59 pm  

बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

Yashwant Yash 1 अक्तूबर 2013 को 4:14 pm  

आपकी मित्रता ऐसे ही खिली रहे।


सादर

सरिता भाटिया 1 अक्तूबर 2013 को 4:57 pm  

आपकी यह रचना कल बुधवार (02-10-2013) को ब्लॉग प्रसारण : 134 पर लिंक की गई है कृपया पधारें.
सादर
सरिता भाटिया

Maheshwari kaneri 1 अक्तूबर 2013 को 6:43 pm  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

काजल कुमार Kajal Kumar 2 अक्तूबर 2013 को 5:08 am  

वाह :)

काव्यसुधा 2 अक्तूबर 2013 को 5:27 am  

वाह बहुत ही भावपूर्ण रचना .. सुन्दर रचना ..

Suresh Chandra (SC) 2 अक्तूबर 2013 को 5:55 am  

ये समय ही है जो हमें जोड़ता है,
फिर हमारा जुड़ाव समयातीत हो जाता है!
उबड़ खाबड़ जीवन की राहों में कोई विरला ऐसा होता है
जो हमारे लिए गीत हो जाता है...

आपकी कविताएं ऐसे ही खिली रहें और खिलखिलाती रहें, मुरझाई दृष्टि को, क्षितिज प्रदान करते हुए... ... ... !!

प्रवीण पाण्डेय 2 अक्तूबर 2013 को 6:13 am  

गहरे भाव व्यक्त करती पंक्तियाँ।

Onkar 2 अक्तूबर 2013 को 8:31 am  

सुन्दर प्रस्तुति

Anupama Tripathi 2 अक्तूबर 2013 को 8:39 am  

ईश्वरीय सा कुछ जब यूँ घट जाता है
जीवन के प्रति स्नेह और प्रगाढ़ हो जाता है

भाव पूर्ण .....बहुत सुंदर अभिव्यक्ति .....!!

ajay yadav 2 अक्तूबर 2013 को 10:32 am  

आदरणीया |
सादर प्रणाम |
बहुत ही सुंदर ,भावाभिव्यक्ति |
.......................................................
एक शायर का पढ़ा याद आ रहा हैं -
"तुमने बर्बाद जिंदगी कर ली जिसमे ,
उस मुहब्बत कों मजहब बना लिया हमने "
************************
“महात्मा गाँधी :एक महान विचारक !”

दिगम्बर नासवा 2 अक्तूबर 2013 को 12:07 pm  

मित्रता दिल से हो तो भाव निकल ही आते हैं .. समय चाहे कितना ही बीत जाए ...

राजीव कुमार झा 2 अक्तूबर 2013 को 12:31 pm  

ये समय ही है जो हमें जोड़ता है,
फिर हमारा जुड़ाव समयातीत हो जाता है!
उबड़ खाबड़ जीवन की राहों में कोई विरला ऐसा होता है
जो हमारे लिए गीत हो जाता है...
बहुत सुंदर .

राजीव कुमार झा 2 अक्तूबर 2013 को 3:07 pm  

इस पोस्ट की चर्चा, बृहस्पतिवार, दिनांक :-03/10/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" चर्चा अंक -15 पर.
आप भी पधारें, सादर ....राजीव कुमार झा

नीरज पाल 3 अक्तूबर 2013 को 10:49 am  

सुन्दर प्रस्तुति।

Mukesh Kumar Sinha 3 अक्तूबर 2013 को 3:05 pm  

sundar bhavpurn.....

संजय जोशी "सजग " 9 अक्तूबर 2013 को 5:29 pm  

बहुत ही उम्दा भाव प्रधान अभिव्यक्ति ..हमेशा की तरह

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग के बारे में

"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

ब्लॉग से जुड़िए!

कविताएँ