अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

भींगना क्या होता है...?


भींगना क्या होता है... ? क्या बारिशों में भींग कर भींगा जा सकता है... या फिर एक सहज सुन्दर और सचमुच का भींगना वो भी होता है जब खिली धूप में उदासी ओढ़े हम दूर किसी आहट... किसी आवाज़ या फिर किसी अनकही बात से भींग जाते हैं...
और हाँ, ये "किसी" की परिभाषा नहीं हो सकती.. ये "किसी" कोई किसी होता ही नहीं ... ये होता है कोई ख़ास जिसकी नमी आपको भीतर तक नम कर जाती है... ऐसे में फिर बारिशों में चलते हुए भी हम आप नहीं भींगते कि पहले से ही जो सराबोर भींगा हुआ हो वो और क्या भींगेगा...!
भींगे मन को भींगाती बारिश भली लग रही थी... ३ डिग्री टेम्परेचर, बादलों से पटा अम्बर, बूँदें, प्लेटफार्म... और इंतज़ार ट्रेन के आने का... यही कुछ तो था... यही कुछ तो होता है हमेशा जीवन में भी... ज़िन्दगी का इंतज़ार करते हुए खड़े रहते हैं हम इस संसार के प्लेटफार्म पर... लेट-सबेर ट्रेन को तो आना ही है... आएगी ही... जायेगी कहाँ...
***
क्लास से लौटते समय ट्रेन का इंतज़ार करते हुए यूँ ही कुछ उकेर रहे थे... कुछ बूंदें... कुछ प्रश्न और उन प्रश्नों के जवाब में फिर गढ़ रहे थे कुछ प्रश्न... उत्तर होना हमें कहाँ आता है... सो हमारे प्रश्नों का उत्तर भी एक प्रश्न ही तो होता है न...

प्रश्नों की 
एक लम्बी श्रृंखला है
और असंख्य दुविधाओं के बीच 
उत्तर पा जाने...
उत्तर हो जाने की...
असीम आस है...!

जीवन, 
टूट रही टहनियों का 
तरु के प्रति 
अप्रतिम विश्वास है...! 

हम ढूंढ रहे हैं 
यहाँ वहाँ 
और वो हरदम 
हमारे करीब है... पास है...!

जीवन, 
एक दूसरे की नमी से
भींगने का नाम है...
भींगना और क्या होता है?
ये तुम्हारे हमारे मन को मिला  
विधाता का अनूठा वरदान है...!

17 टिप्पणियाँ:

Mukesh Pandey 24 अक्तूबर 2013 को 10:13 am  

आप बहुत ही सहज और कोमल लिखती हैं। मन भीग गया पढ़ कर।

संजय जोशी "सजग " 24 अक्तूबर 2013 को 11:33 am  

बहुत सुंदर और भाव प्रधान अभिव्यक्ति .......

राजेंद्र कुमार 24 अक्तूबर 2013 को 11:44 am  

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (25-10-2013) को " ऐसे ही रहना तुम (चर्चा -1409)" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.

रश्मि प्रभा... 24 अक्तूबर 2013 को 11:45 am  

उत्तर पाने,होने के मध्य ही परिवर्तन की अपेक्षा होती है

कालीपद प्रसाद 24 अक्तूबर 2013 को 1:15 pm  

बहुत सुन्दर भाव से भीगा दिया आपने |
नई पोस्ट मैं

expression 24 अक्तूबर 2013 को 2:44 pm  

भीगेंगे ,तभी न दूर होगी रुखाई.....तभी न फूटेंगे नवांकुर....

अनु

निहार रंजन 25 अक्तूबर 2013 को 3:16 am  

हम ढूंढ रहे हैं
यहाँ वहाँ
और वो हरदम
हमारे करीब है... पास है...!


यही सच है. सुन्दर पंक्तियाँ.

ajay yadav 25 अक्तूबर 2013 को 5:38 am  

दर्शन ,जीवन दर्शन |
“अजेय-असीम{Unlimited Potential}”

प्रवीण पाण्डेय 25 अक्तूबर 2013 को 7:30 am  

एक दूसरे को भावों की तरसता से समझना पड़ता है, सुन्दर कविता।

प्रवीण पाण्डेय 25 अक्तूबर 2013 को 7:30 am  

*तरलता

Ashok Saluja 25 अक्तूबर 2013 को 7:33 am  

ये वो अहसास हैं ...जो सूखे दिल को भिगो जाते हैं ......
स्वस्थ रहें!

Pratibha Verma 25 अक्तूबर 2013 को 8:02 am  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति। ।

संध्या शर्मा 25 अक्तूबर 2013 को 10:47 am  

रोम-रोम तरबतर होना भावों की नमी से … बहुत सुन्दर रचना … शुभकामनायें

Yashwant Yash 26 अक्तूबर 2013 को 5:31 am  

बहुत ही बढ़िया



सादर

काजल कुमार Kajal Kumar 26 अक्तूबर 2013 को 11:18 am  

भावपूर्ण

दिगम्बर नासवा 26 अक्तूबर 2013 को 1:01 pm  

सच कहा है प्रेम में बीगना ही तो जीवन है ...
इसकी नमी साथ रहती है हमेशा ...

gautam kumar 26 अक्तूबर 2013 को 6:34 pm  

Aaj aapne ye aehsas dila diya ki samay jaisa bhi ho sahitya hamesa jeevit rahta hai.
Aaj hamare samaj ko aapke jaise sahityakar , kaviyitri, lekhak ki jarurat hai.
Mai GAUTAM GUPTA aapko jamui ki manoram vadiyon and tirthsthalo ko dekhne ka nayota deta hun. Please once come jamui district. Situated in bihar.
gautam.gupta71@gmail.com

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग के बारे में

"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

ब्लॉग से जुड़िए!

कविताएँ