किसी भी बात पर जब
मिथ्याभिमान होने लगे,
तो, याद रहे...
तुमसे भी कोई बड़ा है!
कितना भी
वृहद् हो गगन,
अपने मद में हो लें हम
कितने भी मगन;
वक़्त
सबको नाप लेता है,
सारे हिसाब देख लेने को
वो अगले मोड़ पर खड़ा है!
किनारे हैं तो बिना मिले भी
साथ चलना तो होगा ही,
मझधार का खेल
समझना तो होगा ही;
समझायेंगे तभी तो पंथी को
कि मिल जाती है मंज़िल,
राह में हैं ठोकरें तो क्या?
हौसला हर रोड़े से बड़ा है!
समस्या आती है तो सहारे सकल
छीन लेती है,
मन की शान्ति समस्त
लील लेती है;
ऐसे में
एक बार झांकना हृदय में,
हाथ थामने को
विधाता स्वयं खड़ा है!
मिट जाता है हर अक्स
उभर कर पानी में,
किसे पता?
क्या होगा घटित कहानी में;
छोटा सा मन
छोटा सा जीवन,
छोटे छोटे एहसासों का
मोल बड़ा है!
अकेला कभी नहीं होता इंसान
बस हौसला रखना,
देखना, अगले मोड़ पर ही...
कोई तेरे लिए खड़ा है!
अगले मोड़ पर ही...!
प्रस्तुतकर्ता
अनुपमा पाठक
at
31 मई 2012

28 टिप्पणियाँ:
You are amazingly Positive Anupama. Beautiful, inspiring poem again. God Bless.
बहुत प्यारी रचना अनुपमा जी.....
bahot achche......
जगत का विस्तार देखकर अपना स्वरूप छोटा लगने लगता है।
क्या सुंदर लिखा है...
अकेला कभी नहीं होता इंसान
बस हौसला रखना,
देखना, अगले मोड़ पर ही...
कोई तेरे लिए खड़ा है!
बहुत खूब !!
समस्या आती है तो सहारे सकल
छीन लेती है,
मन की शान्ति समस्त
लील लेती है;
ऐसे में
एक बार झांकना हृदय में,
हाथ थामने को
विधाता स्वयं खड़ा है!
......सच कहा आपने ....अपनी तरफ से सारे प्रयत्न करके बस इश्वर के आगे हाथ खड़े करदो ....और बाकि सब उस पर छोड़ दो ...फिर जो होगा वह सबसे श्रेष्ठ होगा क्योंकि वह 'उसकी' मर्ज़ी से होगा ...!!!
बहुत बढिया भाव
वक़्त
सबको नाप लेता है,
सारे हिसाब देख लेने को
वो अगले मोड़ पर खड़ा है!
.....लाज़वाब....सकारात्मक सोच लिये बहुत प्रभावी रचना...
जब हौसला हो और आपका विश्वास तो बुरी से बुरी स्थिति में ही राह दिखाने वाला अगले ही मोड़ पर मिल जाएगा, आप कदम तो बढ़ाइए।
हम पोस्टों को आंकते नहीं , बांटते भर हैं , सो आज भी बांटी हैं कुछ पोस्टें , एक आपकी भी है , लिंक पर चटका लगा दें आप पहुंच जाएंगे , आज की बुलेटिन पोस्ट पर
Waah!!Inspirational kavita hai :) :)
अकेला कभी नहीं होता इंसान
बस हौसला रखना,
देखना, अगले मोड़ पर ही...
कोई तेरे लिए खड़ा है!
आपने सच कहा,,,, अनुपमा जी
बहुत बढ़िया प्रस्तुति,सुंदर रचना,,,,,
RECENT POST ,,,, काव्यान्जलि ,,,, अकेलापन ,,,,
और जो बड़ा है , वह विनम्र बन टिका है , किसी गुमां में नहीं
मिट जाता है हर अक्स
उभर कर पानी में,
किसे पता?
क्या होगा घटित कहानी में;
छोटा सा मन
छोटा सा जीवन,
छोटे छोटे एहसासों का
मोल बड़ा है!
...लगता है जैसे एकसाथ लाखों मनुष्यों के हृदय में झाँक कर छोटे-छोटे अहसासों का एक सर्वव्यापी भाव चुरा लाती हो..कोइ लफ्फाजी नहीं, कितनी सादगी से उन भावों को फिर हमारे सामने रख भी देती हो.. सैकड़ों उलझी-पुल्झी कवितायें जी तोड़ कोशिश कर जो एक सच ढूँढ कर व्यक्त करने का दावा कर पाती हैं वो तुम अपनी सादगी में यूं ही कह देती हो... मुझे तुम और मेरे प्यारे मुन्ना के चुनाव पर गर्व है...
इन्सान सब जानकर भी अपनी पर अड़ा है .
हौसला हिम्मत जरूरी है...बहुत सुन्दर लिखा है अनुपमा जी..
अकेला कभी नहीं होता इंसान
बस हौसला रखना,
देखना, अगले मोड़ पर ही...
कोई तेरे लिए खड़ा है!
बहुत सुंदर ! यही विश्वास तो जीवन का सम्बल है...
जब हम अपने अहंकार को त्यागकर उसके चरणों में समर्पित हो जाते हैं तो वह हमारे समस्त रोग, क्षेम वाहन करने को तत्पर रहता है.. बहुत ही अच्छी बात कही!!
छोटा सा मन
छोटा सा जीवन,
छोटे छोटे एहसासों का
मोल बड़ा है!
बहुत सुंदर रचना...!
अकेला कभी नहीं होता इंसान
बस हौसला रखना,
देखना, अगले मोड़ पर ही...
कोई तेरे लिए खड़ा है!
वाह बहुत खूब इतना विश्वास ही काफ़ी है जीने के लिये
बढ़िया रचना
राजस्थान : जातिवादी तत्वों के मुंह पर एक करारा तमाचा
ishi hausle ko hi to jindgi kahte hai....
एक बार झांकना हृदय में,
हाथ थामने को
विधाता स्वयं खड़ा है!
"सच में"
बहूत हि अच्छी बात कही है है आपने
अकेला कभी नहीं होता इंसान
बस हौसला रखना,
देखना, अगले मोड़ पर ही...
कोई तेरे लिए खड़ा है!
ये पंक्तीया तो गजब कि है..
बहूत हि बेहतरीन रचना:-)
बहुत सुन्दर भावपूर्ण कविता है |
आशा
फिर कुछ ही पल में जाती रही उदासी
कोई बड़ा सन्दर्भ नहीं... है बात ये जरा सी
इन पंक्तियों में आपने स्पष्टीकरण भी दे दिया।
बारिश के बहाने अच्छी कविता।
आपकी कविता का भाव मन को स्पंदित कर गया । किसी भी कविता में भाव-प्रवणता का समन्वय उसे सार्थकता प्रदान करता है । मेरे नए पोस्ट खड़ी बोली का प्रतिनिधि कवि-मैथिलीशरण गुप्त पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।
यह साहित्य के शिल्पकारी का एक बेजोड़ उदाहरण है ......
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