ख़ुशी थोड़ी कम है...!

बहुत सारा दर्द
बिखरा है ज़माने में,
ख़ुशी थोड़ी कम है...
सूखेपन से
जगह-जगह दरक गयी है धरती,
आँख कुछ नम है...

ऐसे में
बारिश की तस्वीर बना कर,
मन बस बहल जाता है...
कविता का अंतस
कोमलता लिखते हुए,
कई बार दहल जाता है...

अपने फूल से
बिछड़ी हुई कोई पंखुड़ी,
कुछ करुण सा गा देती है...
वहीँ से लेखनी
कोई तान चुन कर,
आपको सुना देती है...

हमारे सन्नाटों में
गूंजती है लगातार जो धुन,
मुखरित उसमे गम है...
बहुत सारा दर्द
बिखरा है ज़माने,
ख़ुशी थोड़ी कम है...!

30 टिप्पणियाँ:

रविकर 14 मई 2012 को 12:47 pm बजे  

बढियां भाव |
शुभकामनायें ||

ANULATA RAJ NAIR 14 मई 2012 को 12:50 pm बजे  

कम ही सही....है तो..................
फिर क्या गम है!!!!!
:-)

चला बिहारी ब्लॉगर बनने 14 मई 2012 को 1:41 pm बजे  

खुशी और दर्द एक चक्र है जीवन के.. कभी ये ऊपर कभी वो.. मगर आपकी कविता में ढलकर तो ये और भी सुन्दर लगने लगते हैं!!

ashish 14 मई 2012 को 1:43 pm बजे  

राही मनवा दुःख की चिंता क्यू सताती है , दुःख तो अपना साथी है :.)

Anupama Tripathi 14 मई 2012 को 2:19 pm बजे  

''दो दिन की जिंदगी में ..
दुखड़े हैं बेशुमार ....
है ज़िंदगी उसी की जो -
हंस हंस के दे गुज़ार...

मरने के सौ बहाने ...
जीने को सिर्फ एक ...
उम्मीद के सुरों पे
बजाते हैं दिल के तार ....''

shalini rastogi 14 मई 2012 को 2:26 pm बजे  

ऐसे में
बारिश की तस्वीर बना कर,
मन बस बहल जाता है........ कितना सुन्दर लिखा है आपने , बस खुशी एक मृगतृष्णा कि भांति मन को छलती रहती है .

रश्मि प्रभा... 14 मई 2012 को 2:42 pm बजे  

उस कम ख़ुशी में बहुत सारे ग़म को भुलाने की अदभुत क्षमता होती है

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया 14 मई 2012 को 2:43 pm बजे  

हमारे सन्नाटों में
गूंजती है लगातार जो धुन,
मुखरित उसमे गम है...
बहुत सारा दर्द
बिखरा है ज़माने,
ख़ुशी थोड़ी कम है...!

कभी खुशी कभी गम यही तो जीवन यथार्थ है .///

MY RECENT POST ,...काव्यान्जलि ...: आज मुझे गाने दो,...

लोकेन्द्र सिंह 14 मई 2012 को 3:32 pm बजे  

बहुत बढ़िया.....

udaya veer singh 14 मई 2012 को 4:11 pm बजे  

दर्द तो अहसास है ,सह लेना सुखद है ,कह लेना दुखद ,पर जो बाँट लेता है ,वह हृदय से विषद है .... सुन्दर सृजन ,

प्रवीण पाण्डेय 14 मई 2012 को 4:26 pm बजे  

जो भी खुशी है, उसे ही सजों ले हम..

M VERMA 14 मई 2012 को 5:03 pm बजे  

बहुत सारा दर्द
बिखरा है ज़माने,
ख़ुशी थोड़ी कम है...!

पर खुशी को मायने भी तो यही दर्द देते हैं

mridula pradhan 14 मई 2012 को 5:39 pm बजे  

bahot khoobsurat.....

मेरा अव्यक्त --राम किशोर उपाध्याय 14 मई 2012 को 6:52 pm बजे  

कविता पढकर ऐसा लगा मानों मै खुद को इस कविता में जी रहा हॅू।
अतुलनीय । बधाई

मेरा अव्यक्त --राम किशोर उपाध्याय 14 मई 2012 को 6:54 pm बजे  

कविता पढकर लगा मानों मैं स्वयं को ही जी रहा हॅू। अतुलनीय रचना के लिए बधाई।

Saras 14 मई 2012 को 6:58 pm बजे  

तब तो खुशियाँ बिखेरना और बांटना और ज्यादा ज़रूरी हो जाता है ....क्यों है न अनुजी

महेन्‍द्र वर्मा 14 मई 2012 को 7:05 pm बजे  

सच तो ये है कि जिंदगी में दर्द और ख़ुशी का बेहरीन संतुलन है,
यह जरूर है कि दुख या दर्द का अहसास कुछ ज्यादा ही होता है।
अच्छी कविता।

मनोज कुमार 14 मई 2012 को 7:26 pm बजे  

खुशी को अपने दामन में भर लें।

Shikha Kaushik 14 मई 2012 को 8:29 pm बजे  

bahut sundar abhivyakti .aabhar

Madhuresh 15 मई 2012 को 12:22 am बजे  

आपके शब्द उन थोड़ी-सी खुशियों को amplify जो कर देते हैं, फिर कम कहाँ रह गयी! :)

Smart Indian 15 मई 2012 को 1:09 am बजे  

बहुत सुन्दर! सहमत हूँ! मुझे लगता है कि प्रकृति में कण-प्रतिकण के संतुलन जैसे सुख-दुख का भी संतुलन है। जब क्षमाशील सहते हैं, हमें पता नहीं लगता परंतु जब कमज़ोर पर चोट लगती है तब कवि-हृदय पिघल जाता है।

ऋता शेखर 'मधु' 15 मई 2012 को 2:35 am बजे  

हर घड़ी दिखा रही है रंग ज़िन्दगी
धूप है कभी, कभी है छाँव ज़िन्दगी
हर पल यहाँ जी भर जिओ

खुशियों के पल भरपूर जीना चाहिए...
क्योंकि यह कम मिलती हैं...

www.navincchaturvedi.blogspot.com 15 मई 2012 को 5:50 am बजे  

सुंदर प्रस्तुति

Anita 15 मई 2012 को 10:49 am बजे  

कभी खुशी कभी गम तो फिर आँख क्यों हो नम...अगर गम न हो तो खुशी को कोई पूछेगा ही नहीं...सुंदर कविता!

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 15 मई 2012 को 3:39 pm बजे  

वाह क्या बात है...बहुत सुन्दर प्रस्तुति

मेरा मन पंछी सा 15 मई 2012 को 5:30 pm बजे  

बहुत -बहुत सुन्दर रचना
सुन्दर प्रस्तुति:-)

महेन्द्र श्रीवास्तव 15 मई 2012 को 6:05 pm बजे  

बहुत सुंदर
क्या कहने

Sawai Singh Rajpurohit 15 मई 2012 को 6:09 pm बजे  

बहुत खूब ... क्या बात कह दी ....

हरकीरत ' हीर' 16 मई 2012 को 1:19 am बजे  

जी हमें इसी थोड़ी ख़ुशी को संजो कर रक्जना है गम के लिए भी ....

बहुत सुंदर रचना .......

Rewa Tibrewal 16 मई 2012 को 6:13 pm बजे  

nice expression.....

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