छाता लगा कर भीगना भी कोई भीगना है..
छाता हाथों में था साथ...और हम थे गगन तले... छतरी के तले नहीं...इस तरह हम दोनों भींगे... छतरी भी और हम भी...!क्या जाने ये भीगना भी भीगना हो या नहीं...
आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 30-07-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2052 में दिया जाएगा धन्यवाद
बहुत ही सुन्दर भाव है आपकी कविता में।स्वयं शून्य
सुन्दर भावपूर्ण ..
6 टिप्पणियाँ:
छाता लगा कर भीगना भी कोई भीगना है..
छाता हाथों में था साथ...
और हम थे गगन तले... छतरी के तले नहीं...
इस तरह हम दोनों भींगे... छतरी भी और हम भी...!
क्या जाने ये भीगना भी भीगना हो या नहीं...
आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 30-07-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2052 में दिया जाएगा
धन्यवाद
बहुत ही सुन्दर भाव है आपकी कविता में।
स्वयं शून्य
सुन्दर भावपूर्ण ..
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