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समय का पहिया निर्विकार घूमता है
प्रस्तुतकर्ता अनुपमा पाठक
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28 मई 2019
यादें, टीसें, दर्द, विदाई
ये हमारे घरों की इंटें हैं
समय का पहिया निर्विकार घूमता है
कि शून्य है सब उसकी परिधि में!
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"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"
इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!
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