उनके पास गीत है...!

उनके पास गीत है
वे गाते हैं...,
पंछी
सारा आकाश
नाप आते हैं

हमारे पास
मुट्ठी भर दाने हैं,
वही...
बस वही हम
लुटाते हैं

इससे पहले कि
ख़ाली हथेलियाँ हमारी शर्मिंदा हों,
चुग कर कुछ मोती...
झट से
वे उड़ जाते हैं

उनके पास गीत है
वे गाते हैं....

36 टिप्पणियाँ:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया 27 अप्रैल 2012 को 4:03 pm बजे  

इससे पहले कि
ख़ाली हथेलियाँ हमारी शर्मिंदा हों,
चुग कर कुछ मोती...
झट से
वे उड़ जाते हैं

उनके पास गीत है
वे गाते हैं....

MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: गजल.....

virendra sharma 27 अप्रैल 2012 को 4:05 pm बजे  

कोमल भाव की सार्थक रचना एक मौन सन्देश देती सी .

इससे पहले कि
ख़ाली हथेलियाँ हमारी शर्मिंदा हों,
चुग कर कुछ मोती...
झट से
वे उड़ जाते हैं

उनके पास गीत है

वे गाते हैं....

कृपया यहाँ भी पधारें -
रक्त तांत्रिक गांधिक आकर्षण है यह ,मामूली नशा नहीं

http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/
आरोग्य की खिड़की
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रश्मि प्रभा... 27 अप्रैल 2012 को 4:29 pm बजे  

ये पंछी हमें लुभाते हैं जीवन राग दे जाते हैं

प्रवीण पाण्डेय 27 अप्रैल 2012 को 4:33 pm बजे  

अपने बन्धनों में बाँधना चाहते हैं हम आसमान के परिन्दों को।

Kailash Sharma 27 अप्रैल 2012 को 4:43 pm बजे  

इससे पहले कि
ख़ाली हथेलियाँ हमारी शर्मिंदा हों,
चुग कर कुछ मोती...
झट से
वे उड़ जाते हैं

....लाज़वाब पंक्तियाँ....बहुत सुंदर

अनामिका की सदायें ...... 27 अप्रैल 2012 को 4:58 pm बजे  

nirmal prastuti.

ANULATA RAJ NAIR 27 अप्रैल 2012 को 6:26 pm बजे  

चलो गायें हम भी पंछियों के संग............
चुरा लें उनके गीत......

Saras 27 अप्रैल 2012 को 6:37 pm बजे  

...और हमारा जीवन संगीत से भर जाते हैं .....

Anju (Anu) Chaudhary 27 अप्रैल 2012 को 7:04 pm बजे  

बहुत खूब ....मोती चुनने की कला किसी किसी को आती हैं

संगीता स्वरुप ( गीत ) 27 अप्रैल 2012 को 7:10 pm बजे  

वाह ....बहुत खूब ...

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून 28 अप्रैल 2012 को 2:58 am बजे  

उनके पास गीत है
वे गाते हैं....

वाह बहुत सुंदर

वाणी गीत 28 अप्रैल 2012 को 4:17 am बजे  

चलो ना , उनके सुर में सुर मिला हम भी गाते हैं :)

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया 28 अप्रैल 2012 को 5:16 am बजे  

बहुत सुंदर प्रस्तुति,लाजबाब पंक्तियाँ,...

अनुपमा जी,...आपकी रचना पसंद आई,..आभार

MY RESENT POST .....आगे कोई मोड नही ....

रविकर 28 अप्रैल 2012 को 6:30 am बजे  

बहुत सुन्दर भाव ।

बधाई ।

सादर ,

खुले विचारों वाला जीवन, चाहत उनकी थोड़ी ।
मुक्त गगन उन्मुक्त उड़ाने, गाये गीत निगोड़ी ।

चौबिस घंटे परबस रविकर, मुट्ठी भर ले दाने-
चाहे जीवन-सार सीखना, पर चिड़िया ना माने ।।

Anita 28 अप्रैल 2012 को 7:01 am बजे  

हमारे पास
मुट्ठी भर दाने हैं,
वही...
बस वही हम
लुटाते हैं
जो जिसके पास हो वही लुटाए...लुटाने का भाव ही तो मुख्य है, पंछी गीत लुटाते हैं, फूल खुशबू और आप शब्दों की यह धारा...

Harish Jharia 28 अप्रैल 2012 को 7:45 am बजे  

हमारे पास
मुट्ठी भर दाने हैं,
वही...
बस वही हम
लुटाते हैं

Excellent expression and vocabulary... took me to the sky for a fluttering flight...
Keep writing...

Human 28 अप्रैल 2012 को 8:13 am बजे  

अच्छा भावान्वेषण । पर्रिदोँ के आसमान की धरती इन्सानोँ से कुछ इस तरह जुदा है। आदमी सीख कर भी सीख नहीँ पाता, पंछी बिन सीखे सीख दे जाता है।

vandana gupta 28 अप्रैल 2012 को 8:57 am बजे  

बेहद खूबसूरत और गहन अभिव्यक्ति

सदा 28 अप्रैल 2012 को 9:03 am बजे  

वाह ...अनुपम भाव संयोजित करती पंक्तियां ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 28 अप्रैल 2012 को 1:19 pm बजे  

वाह...बहुत सुन्दर, सार्थक और सटीक!
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

sushila 28 अप्रैल 2012 को 2:01 pm बजे  

"इससे पहले कि
ख़ाली हथेलियाँ हमारी शर्मिंदा हों,
चुग कर कुछ मोती...
झट से
वे उड़ जाते हैं"
बहुत ही सुंदर !

ashish 28 अप्रैल 2012 को 2:29 pm बजे  

सुँदर गीत .

Anupama Tripathi 28 अप्रैल 2012 को 5:15 pm बजे  

गीत गाते गाते आसमान नाप जाते हैं ....हकीकत है ....
बहुत सुंदर रचना ....

Dr. sandhya tiwari 28 अप्रैल 2012 को 5:53 pm बजे  

काश ! हम भी आजाद पंछी बन पाते |

मनोज कुमार 28 अप्रैल 2012 को 7:49 pm बजे  

आपकी यह कविता मुझे बहुत सशक्त लगी। कोई शाब्दिक लफ़्फ़ाज़ी नहीं, बस सीधे-सरल शब्दों में गम्भीर बात।

लोकेन्द्र सिंह 28 अप्रैल 2012 को 8:15 pm बजे  

बहुत बढ़िया...

M VERMA 29 अप्रैल 2012 को 3:57 am बजे  

बेहद खूबसूरत भाव

रचना दीक्षित 29 अप्रैल 2012 को 8:36 am बजे  

इससे पहले कि
ख़ाली हथेलियाँ हमारी शर्मिंदा हों,
चुग कर कुछ मोती...
झट से
वे उड़ जाते हैं

उनके पास गीत है
वे गाते हैं....

आप अपने भावों को बहुत सरलता और सुंदरता से प्रस्तुत कर देती है यही आपकी सबसे बड़ी खूबी है. बधाई.

महेन्‍द्र वर्मा 29 अप्रैल 2012 को 12:13 pm बजे  

पंछियों के गीत हमें प्रेरणा देते हैं।
अच्छी कविता।

Prakash Jain 29 अप्रैल 2012 को 6:02 pm बजे  

Bahut sundar:-)

Rewa Tibrewal 30 अप्रैल 2012 को 7:08 am बजे  

behad khubsoorati say likha hai apne

अशोक सलूजा 30 अप्रैल 2012 को 7:47 pm बजे  

सच है! सारी बाते भली हैं .....
शुभकामनाएँ!

Tilak Relan 30 अप्रैल 2012 को 9:44 pm बजे  

Bahut sundar bhav hain, Bahut Bahut Badhaai

abhi 2 मई 2012 को 4:54 am बजे  

:):):) waah..kitni khoobsurat kavita likhi hai aapne!!!

Maheshwari kaneri 2 मई 2012 को 2:33 pm बजे  

वाह:बहुत सुन्दर प्रस्तुति....अनुपमाजी..

मन 11 जुलाई 2015 को 8:53 am बजे  

रूनझुन सी सरगम ... :)

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