अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

उनके पास गीत है...!

उनके पास गीत है
वे गाते हैं...,
पंछी
सारा आकाश
नाप आते हैं

हमारे पास
मुट्ठी भर दाने हैं,
वही...
बस वही हम
लुटाते हैं

इससे पहले कि
ख़ाली हथेलियाँ हमारी शर्मिंदा हों,
चुग कर कुछ मोती...
झट से
वे उड़ जाते हैं

उनके पास गीत है
वे गाते हैं....

38 टिप्पणियाँ:

dheerendra 27 अप्रैल 2012 को 4:03 pm  

इससे पहले कि
ख़ाली हथेलियाँ हमारी शर्मिंदा हों,
चुग कर कुछ मोती...
झट से
वे उड़ जाते हैं

उनके पास गीत है
वे गाते हैं....

MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: गजल.....

veerubhai 27 अप्रैल 2012 को 4:05 pm  

कोमल भाव की सार्थक रचना एक मौन सन्देश देती सी .

इससे पहले कि
ख़ाली हथेलियाँ हमारी शर्मिंदा हों,
चुग कर कुछ मोती...
झट से
वे उड़ जाते हैं

उनके पास गीत है

वे गाते हैं....

कृपया यहाँ भी पधारें -
रक्त तांत्रिक गांधिक आकर्षण है यह ,मामूली नशा नहीं

http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/
आरोग्य की खिड़की
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http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/2012/04/blog-post_992.html

रश्मि प्रभा... 27 अप्रैल 2012 को 4:29 pm  

ये पंछी हमें लुभाते हैं जीवन राग दे जाते हैं

प्रवीण पाण्डेय 27 अप्रैल 2012 को 4:33 pm  

अपने बन्धनों में बाँधना चाहते हैं हम आसमान के परिन्दों को।

Kailash Sharma 27 अप्रैल 2012 को 4:43 pm  

इससे पहले कि
ख़ाली हथेलियाँ हमारी शर्मिंदा हों,
चुग कर कुछ मोती...
झट से
वे उड़ जाते हैं

....लाज़वाब पंक्तियाँ....बहुत सुंदर

अनामिका की सदायें ...... 27 अप्रैल 2012 को 4:58 pm  

nirmal prastuti.

expression 27 अप्रैल 2012 को 6:26 pm  

चलो गायें हम भी पंछियों के संग............
चुरा लें उनके गीत......

Saras 27 अप्रैल 2012 को 6:37 pm  

...और हमारा जीवन संगीत से भर जाते हैं .....

anju(anu) choudhary 27 अप्रैल 2012 को 7:04 pm  

बहुत खूब ....मोती चुनने की कला किसी किसी को आती हैं

संगीता स्वरुप ( गीत ) 27 अप्रैल 2012 को 7:10 pm  

वाह ....बहुत खूब ...

काजल कुमार Kajal Kumar 28 अप्रैल 2012 को 2:58 am  

उनके पास गीत है
वे गाते हैं....

वाह बहुत सुंदर

वाणी गीत 28 अप्रैल 2012 को 4:17 am  

चलो ना , उनके सुर में सुर मिला हम भी गाते हैं :)

dheerendra 28 अप्रैल 2012 को 5:16 am  

बहुत सुंदर प्रस्तुति,लाजबाब पंक्तियाँ,...

अनुपमा जी,...आपकी रचना पसंद आई,..आभार

MY RESENT POST .....आगे कोई मोड नही ....

रविकर फैजाबादी 28 अप्रैल 2012 को 6:30 am  

बहुत सुन्दर भाव ।

बधाई ।

सादर ,

खुले विचारों वाला जीवन, चाहत उनकी थोड़ी ।
मुक्त गगन उन्मुक्त उड़ाने, गाये गीत निगोड़ी ।

चौबिस घंटे परबस रविकर, मुट्ठी भर ले दाने-
चाहे जीवन-सार सीखना, पर चिड़िया ना माने ।।

Anita 28 अप्रैल 2012 को 7:01 am  

हमारे पास
मुट्ठी भर दाने हैं,
वही...
बस वही हम
लुटाते हैं
जो जिसके पास हो वही लुटाए...लुटाने का भाव ही तो मुख्य है, पंछी गीत लुटाते हैं, फूल खुशबू और आप शब्दों की यह धारा...

Harish Jharia 28 अप्रैल 2012 को 7:45 am  

हमारे पास
मुट्ठी भर दाने हैं,
वही...
बस वही हम
लुटाते हैं

Excellent expression and vocabulary... took me to the sky for a fluttering flight...
Keep writing...

Human 28 अप्रैल 2012 को 8:13 am  

अच्छा भावान्वेषण । पर्रिदोँ के आसमान की धरती इन्सानोँ से कुछ इस तरह जुदा है। आदमी सीख कर भी सीख नहीँ पाता, पंछी बिन सीखे सीख दे जाता है।

वन्दना 28 अप्रैल 2012 को 8:57 am  

बेहद खूबसूरत और गहन अभिव्यक्ति

सदा 28 अप्रैल 2012 को 9:03 am  

वाह ...अनुपम भाव संयोजित करती पंक्तियां ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) 28 अप्रैल 2012 को 1:19 pm  

वाह...बहुत सुन्दर, सार्थक और सटीक!
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

sushila 28 अप्रैल 2012 को 2:01 pm  

"इससे पहले कि
ख़ाली हथेलियाँ हमारी शर्मिंदा हों,
चुग कर कुछ मोती...
झट से
वे उड़ जाते हैं"
बहुत ही सुंदर !

ashish 28 अप्रैल 2012 को 2:29 pm  

सुँदर गीत .

यशवन्त माथुर 28 अप्रैल 2012 को 3:37 pm  

बेहतरीन


सादर

Anupama Tripathi 28 अप्रैल 2012 को 5:15 pm  

गीत गाते गाते आसमान नाप जाते हैं ....हकीकत है ....
बहुत सुंदर रचना ....

Dr. sandhya tiwari 28 अप्रैल 2012 को 5:53 pm  

काश ! हम भी आजाद पंछी बन पाते |

मनोज कुमार 28 अप्रैल 2012 को 7:49 pm  

आपकी यह कविता मुझे बहुत सशक्त लगी। कोई शाब्दिक लफ़्फ़ाज़ी नहीं, बस सीधे-सरल शब्दों में गम्भीर बात।

lokendra singh rajput 28 अप्रैल 2012 को 8:15 pm  

बहुत बढ़िया...

M VERMA 29 अप्रैल 2012 को 3:57 am  

बेहद खूबसूरत भाव

Onkar 29 अप्रैल 2012 को 7:05 am  

bahut sundar

रचना दीक्षित 29 अप्रैल 2012 को 8:36 am  

इससे पहले कि
ख़ाली हथेलियाँ हमारी शर्मिंदा हों,
चुग कर कुछ मोती...
झट से
वे उड़ जाते हैं

उनके पास गीत है
वे गाते हैं....

आप अपने भावों को बहुत सरलता और सुंदरता से प्रस्तुत कर देती है यही आपकी सबसे बड़ी खूबी है. बधाई.

mahendra verma 29 अप्रैल 2012 को 12:13 pm  

पंछियों के गीत हमें प्रेरणा देते हैं।
अच्छी कविता।

Prakash Jain 29 अप्रैल 2012 को 6:02 pm  

Bahut sundar:-)

Rewa 30 अप्रैल 2012 को 7:08 am  

behad khubsoorati say likha hai apne

यादें....ashok saluja . 30 अप्रैल 2012 को 7:47 pm  

सच है! सारी बाते भली हैं .....
शुभकामनाएँ!

तिलक रेलन 30 अप्रैल 2012 को 9:44 pm  

Bahut sundar bhav hain, Bahut Bahut Badhaai

abhi 2 मई 2012 को 4:54 am  

:):):) waah..kitni khoobsurat kavita likhi hai aapne!!!

Maheshwari kaneri 2 मई 2012 को 2:33 pm  

वाह:बहुत सुन्दर प्रस्तुति....अनुपमाजी..

Sound of Silence 11 जुलाई 2015 को 8:53 am  

रूनझुन सी सरगम ... :)

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