बात भले निराशा की हो कविता में पर आस का खग अपना गीत गा ही जाएगा... आस का दूसरा नाम ही तो कविता है!
हर वक़्त
नहीं कर सकते हम
आस की बातें,
कभी कभी
निराशा के सिवा
कोई रंग ही नहीं बचता है ज़िन्दगी में!
हमेशा नहीं हो सकती
केवल
चांदनी रातें,
कभी कभी
अन्धकार ही अन्धकार भी
सजता है ज़िन्दगी में!!
हमेशा
कविता भी नहीं
हो सकती साथ,
कभी कभी
मौन सा भी कुछ
रचता है ज़िन्दगी में!
हमेशा
नहीं रहता सबकुछ
हमारे हाथ,
कभी कभी
हमें वक़्त भी
आजमाता है ज़िन्दगी में!!
हर दिन नया है
हर सूर्योदय की
बात नयी,
परिवर्तन
हर क्षण
बसता है ज़िन्दगी में!
अपने आप में
ही मग्न
हर शाम गयी,
इसलिए ही
शायद
नीरसता है ज़िन्दगी में!!
खुद
बांटता नहीं कुछ
फिर उसे क्या मिले,
थोड़े से
नेह को इंसान
तरसता है ज़िन्दगी में!
मुरझाया हो मन
फिर
कैसे फूल खिले,
ज़रा तो
खबर हो
कितनी सरसता है ज़िन्दगी में!!
कितनी ही
कथा कहानी
है कितनी ही बातें,
बस उमंग ही न हो
फिर
क्या बचता है ज़िन्दगी में!
दिन जो
बीत गया है
बीत जायेंगी रातें,
ये आने
और चले जाने का सिलसिला
यूँ ही चलता है ज़िन्दगी में!!
निराश कविता में आस की पदचाप!
प्रस्तुतकर्ता
अनुपमा पाठक
at
23 नवंबर 2011

32 टिप्पणियाँ:
बीत जायेंगी रातें,
ये आने
और चले जाने का सिलसिला
यूँ ही चलता है ज़िन्दगी में!!
बहुत सुंदर ....हवा के झोंके सी बहती हुई कविता .....
बहुत अच्छे भाव,अच्छा लिखा है आपने !
sach hai kabhi kabhi udaasi cha jaati hai....bahut acchi rachna
बहुत ही सुन्दर भाव संयोजन्।
कभी कभी
मौन सा भी कुछ
रचता है ज़िन्दगी में!
बहुत खूब...सुन्दर कविता
sateek v yatharth se roobroo karati kavita .bahut sundar .aabhar
बहुत सुन्दर विचारों से सजी एक उम्दा कविता |
खुद
बांटता नहीं कुछ
फिर उसे क्या मिले,
थोड़े से
नेह को इंसान
तरसता है ज़िन्दगी में!
अपनी सी बात कहती एक बहुत ही अच्छी कविता।
सादर
आस का दूसरा नाम ही कविता है....
वाह बहुत सुन्दर बात कही आपने आदरणीया अनुपमा जी...
आपकी रचना रात और दिन दोनों को ही खूबसूरती एवं सार्थकता से बिम्बित कर रही है...
|| जीवन कभी निराश है, सच्ची है ये बात
हर रजनी के बाद पर, आता है परभात ||
सादर....
दिन जो
बीत गया है
बीत जायेंगी रातें,
ये आने
और चले जाने का सिलसिला
यूँ ही चलता है ज़िन्दगी में!!
सही चित्रण किया वक्त और जिन्दगी का...
कभी कभी
निराशा के सिवा
कोई रंग ही नहीं बचता है ज़िन्दगी में!... इसी रंग से तो होड़ लेने में हम आशा के दीप जलाते हैं
सही चित्रण किया वक्त और जिन्दगी का...बेहतरीन भावपूर्ण रचना.....
maun khaamosh nahee rahtaa
bahut kuchh bata detaa hai
samajhne waale samajh jaate hein
andhere ke baad ujaalaa hee aataa hai
दिन जो
बीत गया है
बीत जायेंगी रातें,
ये आने
और चले जाने का सिलसिला
यूँ ही चलता है ज़िन्दगी में!!
बहुत उत्तम सृजन!
नि:शब्द ..!
ऐसी रचना पर शुभ व मंगल कामनायों के अतिरिक्त और क्या कहें .. अनुपमा जी आपकी तुलिका नेह सरसता व उमंग के रंग यूं ही बिखेरे सदा ..
हमेशा
कविता भी नहीं
हो सकती साथ,
कभी कभी
मौन सा भी कुछ
रचता है ज़िन्दगी में!
गहन भाव
बहुत सुंदर,
आपको पढना वाकई अच्छा लगता है,
हर बार अलग बिल्कुल अलग
सुंदर भाव...
बेहतरीन शब्द संयोजन।
bahut kuchh hai zindgi me pane ko lekin uske liye nazariya aashawadi hona jaruri hai.
Hi..
Aaj pahli baar aapke blog par aaya hun, ab sochta hun ki pahle kyon aaya.. Aapke blog ke anusarankartaon ka dohra shatak lagne ke baad maine aaj apmna sthan bhi sunishchiyt kiya hai..jis se aapki aane wali sabhi rachnayen main avilamb padh sakun..
Jeevan nirantarta ka naam hai..
Har raat ke baad subah, har gam ke baad khushi, nirasha ke baad aasha..nazm ke baad geet aur geet ke baad gazal aati hi hai.. Nirasha ho ya aasha, avsaad ho ya virakti..kavita har sthiti, manahsthiti main jinda rahti hai..
Bahut hi Anupam kruti..
Shubhkamnayen..
Deepak..
खुद
बांटता नहीं कुछ
फिर उसे क्या मिले,
थोड़े से
नेह को इंसान
तरसता है ज़िन्दगी में!
बहुत सुंदर रचना ...सार्थक विचार
ज़िंदगी कि सच्चाई को कहती सुन्दर रचना .
अच्छी भावपूर्ण रचना के लिए बधाई |
आशा
आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच-708:चर्चाकार-दिलबाग विर्क
बहुत सुन्दर लिखा है...आभार
ज़िंदगी को ज़िंदगी रहने दें यही बहुत है.. अनेक रंग हैं ज़िंदगी के, जैसा आपने कहा!! हलके शब्दों में गहरी बात बता दी आपने!!
दिन जो
बीत गया है
बीत जायेंगी रातें,
ये आने
और चले जाने का सिलसिला
यूँ ही चलता है ज़िन्दगी में!!
...निशब्द कर दिया आपकी रचना ने....अंतस को अन्दर तक भिगो गयी..
कविता के भाव प्रभावित करते हैं।
sundar rachna..gahan bhav..
अच्छी रचना के लिए आपको बधाई । आप हमेशा सृजनरत रहें और मेरे ब्लॉग पर आपकी सादर उपस्थिति बनी रहे । धन्यवाद ।
मित्रों चर्चा मंच के, देखो पन्ने खोल |
आओ धक्का मार के, महंगा है पेट्रोल ||
--
बुधवारीय चर्चा मंच ।
आज 21/01/2013 को आपकी यह पोस्ट (दीप्ति शर्मा जी की प्रस्तुति मे ) http://nayi-purani-halchal.blogspot.com पर पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!
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