भावांजलि : सलाम, अपराजिता शर्मा

जो एकाएक उठ कर चल देते हैं बस 

इस धराधाम से 
असमय 
वो कितना विराट शून्य छोड़ जाते हैं पीछे।


पर,

यह भी है 
कि हम कौन होते हैं ये कहने वाले 
कि वे असमय चले गए 


हो सकता है 
यही यथेष्ट समय हो
यही सबसे उचित मुहूर्त हो 
जिसमें 
आत्मा ने अपना प्रस्थान चुना हो 


कौन जाने !


हम जहाँ हैं वहीं से
उस आत्मा की आगे की यात्रा के लिए 
प्रार्थनारत हो लें 


जिस सकारात्मकता की वो प्रतीक थीं 
उसी सकारात्मक ऊर्जा के साथ 
उन्हें विदा किया जाए 


उनके साथी 
उनकी जननी 
उनका परिवार 
उनके अपने 
और हम सब उन्हें ख़ूब शुभकामनाओं के साथ विदा करें 
कि वह चैतन्य आत्मा अपनी आगे की यात्रा 
असीम शांति के साथ तय कर सके!


विजयदशमी के पावन दिवस 
सौभाग्यवती गयीं वे 
जैसे देवी ने नियत दिन चुना हो अपने प्रस्थान के लिए 


यह विदा 
भौतिक स्थूल शरीर का सत्य है मात्र 


आदि शक्ति कभी विदा होती नहीं 
वो तो बस 

उनकी प्रतिकृति 
उनकी प्रस्तर प्रतिमा 
विसर्जित की जाती है 


अपराजिता को तो संभाल कर रख लिया जाता है पूजा घर में 


शरीर की विदाई है यह 
आत्मा अजर अमर है 


वो कहीं नहीं गयी 
कहीं नहीं जाएगी !


-----------

अपराजिता जी, आपकी कला दुनिया रहते इस जगत का हिस्सा रहेगी और अलबेली दिग्दिगंत तक अमर।

सलाम आपकी यादों को।


प्रार्थनाएँ शोक संतप्त परिवार के लिए!





7 टिप्पणियाँ:

yashoda Agrawal 18 अक्टूबर 2021 को 3:11 am बजे  

आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 19 अक्टूबर 2021 को साझा की गयी है....
पाँच लिंकों का आनन्द पर
आप भी आइएगा....धन्यवाद!

जितेन्द्र माथुर 18 अक्टूबर 2021 को 4:56 am बजे  

श्रद्धांजलि एवं नमन। आपकी अति-प्रशंसनीय भावाभिव्यक्ति हेतु आपका आभार एवं अभिनंदन।

सुनीता अग्रवाल "नेह" 18 अक्टूबर 2021 को 6:39 am बजे  

सच है अपराजिता अलबेली के रूप में अजर अमर है

सुनीता अग्रवाल "नेह" 18 अक्टूबर 2021 को 6:39 am बजे  

सच है अपराजिता जी अलबेली के रूप में सदा हमारे साथ हमारे बीच ही रहेंगी ।

Anita 18 अक्टूबर 2021 को 8:23 am बजे  

सही है, यहाँ कुछ भी असमय नहीं होता, विनम्र श्र्द्धांजलि !

Onkar 19 अक्टूबर 2021 को 2:05 am बजे  

सुंदर सृजन

Kuldeepwrites 8 फ़रवरी 2022 को 3:23 pm बजे  

सुंदर

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