खाली पाँव ज़िन्दगी

कहना कुछ होता है
कह कुछ जाते हैं 


होना कुछ होता है
हो कुछ जाता है 


खाली पाँव
चलती हुई ज़िंदगी के
तलुवों में
जितने भी काँटे चुभते हैं 


सब नियति के मारे हैं 


चुभना उनका उद्देश्य नहीं
उनकी प्रकृति है 


वे चुभेंगे ही 


जीवन का स्वभाव
चलते जाने की पुष्टि है
वो चलेगी ही 


विराट दुख के साँचों में
ढल कर भी
ज़िन्दगी
ज़िन्दगी ही रहेगी 


मृत्यु के 

नीरव सुनसान में भी

वो खनकती हुई 

कथा ही कहेगी


ढहते हुए सपनों संग
हम भी ढह जाने हैं 


गति के प्रतिमान फिर भी रह जाने हैं.

5 टिप्पणियाँ:

Anita 15 नवंबर 2017 को 9:07 am बजे  

जब तक कि हमें खुद की खबर नहीं यह सब होना ही है

Manoj Kumar 16 नवंबर 2017 को 1:15 am बजे  



सुन्दर रचना



आत्मविश्वास कैसे बनाये रखे

Sweta sinha 16 नवंबर 2017 को 1:45 pm बजे  

जी,नमस्ते।
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 17 नवम्बर 2017 को साझा की गई है..................http://halchalwith5links.blogspot.com पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

NITU THAKUR 17 नवंबर 2017 को 6:21 am बजे  

bahot khoob kitni khoobsurti se aap ne jeevan ko darshaya hai...apratim

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 17 नवंबर 2017 को 10:49 am बजे  

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (18-11-2017) को "नागफनी के फूल" (चर्चा अंक 2791) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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