शब्द हो जाते हैं मौन
जब प्रेम मुखर होता है!
हर ऊँचाई होती है गौण
जब प्रेम शिखर होता है!
सारे दर्द जाते हैं बिसर
जब प्रेम सजग होता है!
गीत गुनगुनाते हैं अधर
जब प्रेम खग होता है!
हार लगती है जीत सी
जब प्रेम प्रखर होता है!
बातें सकल हो गीत सी
जब प्रेम स्वर होता है!
अद्भुत होती है अनुभूति
जब प्रेम जग होता है!
नाप ली जाती है सृष्टि
जब प्रेम पग होता है!
डूबने से बच पाया कौन
जब प्रेम सरोवर होता है!
शब्द हो जाते हैं मौन
जब प्रेम मुखर होता है!
जब प्रेम मुखर होता है!
प्रस्तुतकर्ता
अनुपमा पाठक
at
11 जनवरी 2011

44 टिप्पणियाँ:
जब प्रेम मुखर होता है
मौन भी मुखर होता है
प्रेम की तो भाषा ही "मौन" होती है...आभार
bhut pyari kavita....aabhar...
अच्छी अभिव्यक्ति,बधाई।
"..डूबने से बच पाया कौन
जब प्रेम सरोवर होता है!
शब्द हो जाते हैं मौन
जब प्रेम मुखर होता है!"
बिलकुल सच कहा आपने.
सादर
प्रेम के एक से बढ़ कर एक खूबसूरत रूप आपने उकेरे है आपने अपनी रचना में...वाह...कमाल किया है...बधाई
नीरज
शब्द हो जाते हैं मौन
जब प्रेम मुखर होता है!
प्रेम जब मुखर होगा तो शायद शब्दों की जरूरत ही न होगी
प्रेम तो मौन ही होता है
सुंदर रचना
आभार
अच्छी अभिव्यक्ति....,
बधाई....।
अहाहा! अद्भुत!
कोरे काग़ज़ सा बदन, हाथ लगाए कौन,
मन में बातें सैंकड़ों, पर होंठों पर मौन।
बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
‘मंहगाई मार गई..!!
शब्द हो जाते हैं मौन
जब प्रेम मुखर होता है!
हर ऊँचाई होती है गौण
जब प्रेम शिखर होता है
बहुत सुंदर अभिव्यक्ति -
शुभकामनाएं
सारे दर्द जाते हैं बिसर
जब प्रेम सजग होता है!
गीत गुनगुनाते हैं अधर
जब प्रेम खग होता है!
बहुत सुन्दर
waaah kyaaa bhaaw hai? A silent has more expressive power than long song of poetry, however long.....Thanks Meaningful poem madam!
Naap li jati hai srishti,
Jab prem pag hota hai!
Sachmuch prem se sab Kuch sambhaw hai !
kavita ke bhaw hridaysparshi hain !
-Gyanchand Marmagya
शब्द हो जाते हैं मौन
जब प्रेम मुखर होता है!
सच्चा प्रेम तो मौन ही होता है..उसे शब्दों की क्या आवश्यकता..बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
प्रेम की भाषा अनोखी है
बहुत सुंदर और एक से बढ़कर एक परिभाषाएं दी हैं आपने प्रेम की !
'शब्द हो जाते हैं मौन
जब प्रेम मुखर होता है '
प्रेम के अथाह सागर में गोता लगाया और लगवाया है आपने !
waah...bahut khub....
अनुपमा जी बहुत ही सुन्दर रचना है...
बुढ़ापा.. ..
प्रभावी रचना ......
अनुपमा जी !! मकर संक्रान्ति पर हार्दिक बधाईयां.. आपकी यह सुन्दर कविता आज चर्चामंच पर है... आपका धन्यवाद ... :)
anupamaji bahut sundar kavita.makar sankranti kr parva par aapko badhai aur shubhkamnayen
जब प्रेम मुखर होता है फिर कहने को कुछ नही बचता है……………।बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति।
अद्भुत होती है अनुभूति
जब प्रेम जग होता है!
नाप ली जाती है सृष्टि
जब प्रेम पग होता है!
इस कविता में प्रेम के अनदेखे पहलुओं का सुंदरता से वर्णन किया है आपने।
रचना में भावों की प्रबलता स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रही है।
बहुत ही भावपूर्ण कविता ...... सुंदर प्रस्तुति.
नये दशक का नया भारत ( भाग- २ ) : गरीबी कैसे मिटे ?
सचमुच, सच्चा प्रेम ऐसा ही होता है।
---------
डा0 अरविंद मिश्र: एक व्यक्ति, एक आंदोलन।
एक फोन और सारी समस्याओं से मुक्ति।
bahut sundar abhivyakti.
आपको लोहड़ी,पोंगल और मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनायें
"डूबने से बच पाया कौन
जब प्रेम सरोवर होता है!
शब्द हो जाते हैं मौन
जब प्रेम मुखर होता है!"
बहुत सुंदर
भक्ति या ज्ञान इनमें से कौन है मुक्ति का पथ -यह शाश्वत मंथन का विषय रहा है -हम सब अपना मार्ग स्वयं तय करें !
नाप ली जाती है सृष्टि
जब प्रेम पग होता है!
bahut sunder likhi hain aap.
Aad.Anupama ji,
62 wen Ganatantra Diwas ki hardik shubhkamnaayen.
प्रभु की
छवि सा
अभिराम
भक्ति है
मुक्ति का
सोपाण!
एकदम सच है..बहुत अच्छी कविता..
गणतंत्र दिवस पर बधाई
स्वीडन में बसंत की हार्दिक शुभकामनायें |
dhanyavad!
बहुत सुन्दर !
अच्छी लगी आपकी ये कविता..
sirf sundar kahne se hi santushti nahi hongi mujhe , ye kavita to man ko choo gayi hai , jaadu ahihaapke shbdo me ...aur ..bas prem to maun hi jyaada accha hota hai ....
badhayi
-----------
मेरी नयी कविता " तेरा नाम " पर आप का स्वागत है .
आपसे निवेदन है की इस अवश्य पढ़िए और अपने कमेन्ट से इसे अनुग्रहित करे.
"""" इस कविता का लिंक है ::::
http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/02/blog-post.html
विजय
हार लगती है जीत सी
जब प्रेम प्रखर होता है!
बातें सकल हो गीत सी
जब प्रेम स्वर होता है!
सुन्दर पंक्तियाँ हैं. साधुवाद!
..............
w a a h !!
अच्छे है आपके विचार, ओरो के ब्लॉग को follow करके या कमेन्ट देकर उनका होसला बढाए ....
चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी (कोई पुरानी या नयी ) प्रस्तुति मंगलवार 14 - 06 - 2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..
साप्ताहिक काव्य मंच- ५० ..चर्चामंच
अद्भुत होती है अनुभूति
जब प्रेम जग होता है!
नाप ली जाती है सृष्टि
जब प्रेम पग होता है!..
बहुत ही सुन्दर रचना ..प्रेम के सौंदर्य एवं पवित्रता को अभिब्यक्त करती कोमल भाव पूर्ण रचना...
sundar bhawpurn kavita ne anandit kiya.सारे दर्द जाते हैं बिसर
जब प्रेम सजग होता है!
गीत गुनगुनाते हैं अधर
जब प्रेम खग होता है!
हार लगती है जीत सी
जब प्रेम प्रखर होता है!
बातें सकल हो गीत सी
जब प्रेम स्वर होता है!..kyaa baat hai
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