जब प्रेम मुखर होता है!

शब्द हो जाते हैं मौन
जब प्रेम मुखर होता है!
हर ऊँचाई होती है गौण
जब प्रेम शिखर होता है!

सारे दर्द जाते हैं बिसर
जब प्रेम सजग होता है!
गीत गुनगुनाते हैं अधर
जब प्रेम खग होता है!

हार लगती है जीत सी
जब प्रेम प्रखर होता है!
बातें सकल हो गीत सी
जब प्रेम स्वर होता है!

अद्भुत होती है अनुभूति
जब प्रेम जग होता है!
नाप ली जाती है सृष्टि
जब प्रेम पग होता है!

डूबने से बच पाया कौन
जब प्रेम सरोवर होता है!
शब्द हो जाते हैं मौन
जब प्रेम मुखर होता है!

44 टिप्पणियाँ:

रश्मि प्रभा... 11 जनवरी 2011 को 12:40 pm बजे  

जब प्रेम मुखर होता है
मौन भी मुखर होता है

Arvind Jangid 11 जनवरी 2011 को 12:49 pm बजे  

प्रेम की तो भाषा ही "मौन" होती है...आभार

PRIYANKA RATHORE 11 जनवरी 2011 को 1:34 pm बजे  

bhut pyari kavita....aabhar...

ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι 11 जनवरी 2011 को 2:10 pm बजे  

अच्छी अभिव्यक्ति,बधाई।

Yashwant R. B. Mathur 11 जनवरी 2011 को 2:20 pm बजे  

"..डूबने से बच पाया कौन
जब प्रेम सरोवर होता है!
शब्द हो जाते हैं मौन
जब प्रेम मुखर होता है!"

बिलकुल सच कहा आपने.

सादर

नीरज गोस्वामी 11 जनवरी 2011 को 2:38 pm बजे  

प्रेम के एक से बढ़ कर एक खूबसूरत रूप आपने उकेरे है आपने अपनी रचना में...वाह...कमाल किया है...बधाई
नीरज

M VERMA 11 जनवरी 2011 को 2:41 pm बजे  

शब्द हो जाते हैं मौन
जब प्रेम मुखर होता है!

प्रेम जब मुखर होगा तो शायद शब्दों की जरूरत ही न होगी

deepti sharma 11 जनवरी 2011 को 3:34 pm बजे  

प्रेम तो मौन ही होता है
सुंदर रचना
आभार

Dinesh Mishra 11 जनवरी 2011 को 4:13 pm बजे  

अच्छी अभिव्यक्ति....,
बधाई....।

मनोज कुमार 11 जनवरी 2011 को 4:34 pm बजे  

अहाहा! अद्भुत!
कोरे काग़ज़ सा बदन, हाथ लगाए कौन,
मन में बातें सैंकड़ों, पर होंठों पर मौन।

बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
‘मंहगाई मार गई..!!

Anupama Tripathi 11 जनवरी 2011 को 4:35 pm बजे  

शब्द हो जाते हैं मौन
जब प्रेम मुखर होता है!
हर ऊँचाई होती है गौण
जब प्रेम शिखर होता है

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति -
शुभकामनाएं

सुनीता 11 जनवरी 2011 को 5:22 pm बजे  

सारे दर्द जाते हैं बिसर
जब प्रेम सजग होता है!
गीत गुनगुनाते हैं अधर
जब प्रेम खग होता है!
बहुत सुन्दर

Dr.J.P.Tiwari 11 जनवरी 2011 को 5:36 pm बजे  

waaah kyaaa bhaaw hai? A silent has more expressive power than long song of poetry, however long.....Thanks Meaningful poem madam!

ज्ञानचंद मर्मज्ञ 11 जनवरी 2011 को 6:09 pm बजे  

Naap li jati hai srishti,
Jab prem pag hota hai!

Sachmuch prem se sab Kuch sambhaw hai !
kavita ke bhaw hridaysparshi hain !

-Gyanchand Marmagya

Kailash Sharma 11 जनवरी 2011 को 6:24 pm बजे  

शब्द हो जाते हैं मौन
जब प्रेम मुखर होता है!

सच्चा प्रेम तो मौन ही होता है..उसे शब्दों की क्या आवश्यकता..बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

babanpandey 12 जनवरी 2011 को 3:48 am बजे  

प्रेम की भाषा अनोखी है

Anita 12 जनवरी 2011 को 8:44 am बजे  

बहुत सुंदर और एक से बढ़कर एक परिभाषाएं दी हैं आपने प्रेम की !

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " 12 जनवरी 2011 को 10:55 am बजे  

'शब्द हो जाते हैं मौन

जब प्रेम मुखर होता है '

प्रेम के अथाह सागर में गोता लगाया और लगवाया है आपने !

Shekhar Suman 12 जनवरी 2011 को 8:12 pm बजे  

waah...bahut khub....
अनुपमा जी बहुत ही सुन्दर रचना है...

बुढ़ापा.. ..

डॉ. मोनिका शर्मा 13 जनवरी 2011 को 4:27 pm बजे  

प्रभावी रचना ......

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति 14 जनवरी 2011 को 5:06 am बजे  

अनुपमा जी !! मकर संक्रान्ति पर हार्दिक बधाईयां.. आपकी यह सुन्दर कविता आज चर्चामंच पर है... आपका धन्यवाद ... :)

जयकृष्ण राय तुषार 14 जनवरी 2011 को 5:28 am बजे  

anupamaji bahut sundar kavita.makar sankranti kr parva par aapko badhai aur shubhkamnayen

vandana gupta 14 जनवरी 2011 को 6:58 am बजे  

जब प्रेम मुखर होता है फिर कहने को कुछ नही बचता है……………।बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति।

महेन्‍द्र वर्मा 14 जनवरी 2011 को 1:54 pm बजे  

अद्भुत होती है अनुभूति
जब प्रेम जग होता है!
नाप ली जाती है सृष्टि
जब प्रेम पग होता है!

इस कविता में प्रेम के अनदेखे पहलुओं का सुंदरता से वर्णन किया है आपने।
रचना में भावों की प्रबलता स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रही है।

उपेन्द्र नाथ 15 जनवरी 2011 को 8:28 am बजे  

बहुत ही भावपूर्ण कविता ...... सुंदर प्रस्तुति.
नये दशक का नया भारत ( भाग- २ ) : गरीबी कैसे मिटे ?

Dr. Zakir Ali Rajnish 15 जनवरी 2011 को 12:21 pm बजे  

सचमुच, सच्‍चा प्रेम ऐसा ही होता है।

---------
डा0 अरविंद मिश्र: एक व्‍यक्ति, एक आंदोलन।
एक फोन और सारी समस्‍याओं से मुक्ति।

Kunwar Kusumesh 15 जनवरी 2011 को 3:12 pm बजे  

bahut sundar abhivyakti.

आपको लोहड़ी,पोंगल और मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनायें

बेनामी 15 जनवरी 2011 को 5:43 pm बजे  

"डूबने से बच पाया कौन
जब प्रेम सरोवर होता है!
शब्द हो जाते हैं मौन
जब प्रेम मुखर होता है!"

बहुत सुंदर

Arvind Mishra 17 जनवरी 2011 को 1:07 pm बजे  

भक्ति या ज्ञान इनमें से कौन है मुक्ति का पथ -यह शाश्वत मंथन का विषय रहा है -हम सब अपना मार्ग स्वयं तय करें !

mridula pradhan 17 जनवरी 2011 को 4:58 pm बजे  

नाप ली जाती है सृष्टि
जब प्रेम पग होता है!

bahut sunder likhi hain aap.

ज्ञानचंद मर्मज्ञ 26 जनवरी 2011 को 6:29 am बजे  

Aad.Anupama ji,
62 wen Ganatantra Diwas ki hardik shubhkamnaayen.

वीना श्रीवास्तव 28 जनवरी 2011 को 3:42 am बजे  

प्रभु की
छवि सा
अभिराम
भक्ति है
मुक्ति का
सोपाण!

एकदम सच है..बहुत अच्छी कविता..
गणतंत्र दिवस पर बधाई

जयकृष्ण राय तुषार 8 फ़रवरी 2011 को 11:07 am बजे  

स्वीडन में बसंत की हार्दिक शुभकामनायें |

अनुपमा पाठक 8 फ़रवरी 2011 को 12:20 pm बजे  

dhanyavad!

अमिताभ मीत 11 फ़रवरी 2011 को 12:50 pm बजे  

बहुत सुन्दर !

Manish Kumar 25 फ़रवरी 2011 को 3:22 pm बजे  

अच्छी लगी आपकी ये कविता..

vijay kumar sappatti 1 मार्च 2011 को 7:16 am बजे  

sirf sundar kahne se hi santushti nahi hongi mujhe , ye kavita to man ko choo gayi hai , jaadu ahihaapke shbdo me ...aur ..bas prem to maun hi jyaada accha hota hai ....

badhayi

-----------
मेरी नयी कविता " तेरा नाम " पर आप का स्वागत है .
आपसे निवेदन है की इस अवश्य पढ़िए और अपने कमेन्ट से इसे अनुग्रहित करे.
"""" इस कविता का लिंक है ::::
http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/02/blog-post.html
विजय

जय 25 मार्च 2011 को 8:48 am बजे  

हार लगती है जीत सी
जब प्रेम प्रखर होता है!
बातें सकल हो गीत सी
जब प्रेम स्वर होता है!

सुन्दर पंक्तियाँ हैं. साधुवाद!

Dr.R.Ramkumar 27 मार्च 2011 को 10:28 am बजे  

..............

daanish 29 मार्च 2011 को 6:31 pm बजे  

w a a h !!

hamarivani 21 अप्रैल 2011 को 5:40 pm बजे  

अच्छे है आपके विचार, ओरो के ब्लॉग को follow करके या कमेन्ट देकर उनका होसला बढाए ....

संगीता स्वरुप ( गीत ) 13 जून 2011 को 12:08 pm बजे  

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी (कोई पुरानी या नयी ) प्रस्तुति मंगलवार 14 - 06 - 2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

साप्ताहिक काव्य मंच- ५० ..चर्चामंच

Unknown 29 जून 2011 को 8:27 am बजे  

अद्भुत होती है अनुभूति
जब प्रेम जग होता है!
नाप ली जाती है सृष्टि
जब प्रेम पग होता है!..
बहुत ही सुन्दर रचना ..प्रेम के सौंदर्य एवं पवित्रता को अभिब्यक्त करती कोमल भाव पूर्ण रचना...

Unknown 30 अप्रैल 2015 को 5:20 pm बजे  

sundar bhawpurn kavita ne anandit kiya.सारे दर्द जाते हैं बिसर
जब प्रेम सजग होता है!
गीत गुनगुनाते हैं अधर
जब प्रेम खग होता है!

हार लगती है जीत सी
जब प्रेम प्रखर होता है!
बातें सकल हो गीत सी
जब प्रेम स्वर होता है!..kyaa baat hai

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