अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

एक पुराने दिन का चाँद...



एक पुराने दिन का चाँद
एक पुराने दिन की याद...


एक पुराना मौसम
अपने बीत जाने के बाद...


यूँ भी कभी कभी रहता है--


अपने "न होने" में

"होने" की टीस सहता है...


समय का दरिया

निर्विकार बहता है... !!




1 टिप्पणियाँ:

anamika ghatak 5 जनवरी 2016 को 6:58 am  

Bahut achcha

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग के बारे में

"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

ब्लॉग से जुड़िए!

कविताएँ