अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

ओस से, आशाएँ लिखता, मन है... !!


एक दिन ढल रहा था...
दूजा निकल रहा था...


ये उत्सव
विदाई का भी था...
और इसमें था निहित
आगत का स्वागत भी...


स्वागत और विदाई का साथ
है अन्योन्याश्रित
और परंपरागत भी...


बूंदों में झिलमिल प्रकाश
अँधेरे को चीरती उजास
सनातन है...


ओस से आशाएँ लिखता...
मन है... !!





6 टिप्पणियाँ:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 1 जनवरी 2016 को 12:50 pm  

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (02-01-2016) को "2016 की मेरी पहली चर्चा" (चर्चा अंक-2209) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
नववर्ष 2016 की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

अनुपमा पाठक 1 जनवरी 2016 को 2:48 pm  

@डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' जी, नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !!

आभार!!

shashi purwar 2 जनवरी 2016 को 10:24 am  

आपको सपरिवार नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ sundar post

अनुपमा पाठक 2 जनवरी 2016 को 12:47 pm  

आपको भी नववर्ष की शुभकामनाएं, Shashi जी !!

Kavita Rawat 2 जनवरी 2016 को 3:11 pm  

बहुत सुन्दर..
आपको भी नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!

Asha Joglekar 8 जनवरी 2016 को 5:22 pm  

सुंदर प्रस्तुति। नव वर्ष मंगलमय हो।

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