अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

उसके परे संसार जाने क्या है... !!

इंतज़ार...


जिन पलों में जीया जा रहा है तुम्हें...
उसके परे संसार जाने क्या है...


ज़िन्दगी, कौन जाने कब तेरे निशाने क्या है...


हर एक पल डूबता उतराता
एक क्षण आस...
फिर मन उदास...


इंतज़ार के रंगों में निहित अनमनी उजास... !


खिलते मुरझाते मन का, संसार जाने क्या है...
इंतज़ार तो शाश्वत है, आधार जाने क्या है... !!






1 टिप्पणियाँ:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 24 दिसंबर 2015 को 2:46 pm  

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (25-12-2015) को ""सांता क्यूं हो उदास आज" (चर्चा अंक-2201) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
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कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
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