अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

मृत्यु की नीरवता में...

बस तस्वीरों में है न...
वो बचपन...


तस्वीरों में ही बच कर रह गए हैं कितने ही एहसास
कितने ही पल...


सब रिश्ते नाते
बस खूंटियों पर टंगी शय होकर रह जायेंगे...
"बीते कल" ने सपने में भी नहीं सोचा होगा
ऐसा भी हो सकता है "आने वाला कल"... !


"आज" की आँखों से आँख मिलाता हुआ
"बीता कल" शर्मशार हो जाता है...
आँखों का पानी अब कहीं
नज़र जो नहीं आता है...


शुष्कता है...
बेरुखी है...
सबके अपने तराने हैं...


उसी ओर बढ़ रहे हैं
हर जीवन को उसी अंतिम मोड़ पर होना है एक दिन...
आश्चर्य! इस बात से फिर भी सब अनजाने हैं... !!




2 टिप्पणियाँ:

सदा 13 दिसंबर 2015 को 12:00 pm  

Behad gehan bhaaav

Anita 14 दिसंबर 2015 को 5:03 am  

जो अनजाना नहीं रहता उसके लिए सब बदल जाता है..न कोई अतीत न भविष्य रह जाता है एक अनोखा अहसास..

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग के बारे में

"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

ब्लॉग से जुड़िए!

कविताएँ