अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

मुस्कुराती रही दुआ... !!

किस्मत का क्या है...


बनती है...
बिगड़ती है...


ज़िन्दगी...
किसी मोड़
नहीं ठहरती है...


वक़्त को फिसल जाना था...
आँखों के सामने से मंज़र बदल जाना था...


सो,
वही हुआ...


हमारे दामन में मुस्कुराती रही दुआ... !!


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इस ब्लॉग के बारे में

"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

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