अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

सफ़र के साथी...!

बादल...
धूप...
पवन...


बारिश...
छाँव...
सिहरन...



प्रार्थना...
दीप...
वंदन... 


समर्पण...
बाती...
चन्दन...


आंसू...
आस...
कविता...


ओस...
विश्वास...
क्षणिकता --


ये सब
सफ़र के साथी हैं... 



ज़िन्दगी इन्हें
अपना सगा बताती है...

राही के साथ चलते हैं...
ये हमें ढालते हैं, हममें ढ़लते हैं...


ऐसे ही ढ़लते ढ़लते
चलते चलते 


शायद
एक रोज़
वह भी आये...


हम
बादल, धूप, पवन हो जायें...!!

4 टिप्पणियाँ:

Dilbag Virk 12 अगस्त 2015 को 4:42 pm  

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 13-08-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2066 में दिया जाएगा
धन्यवाद

Digvijay Agrawal 13 अगस्त 2015 को 2:17 am  

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 14 अगस्त 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

सुशील कुमार जोशी 14 अगस्त 2015 को 7:00 am  

बहुत सुंदर !

Madan Mohan Saxena 14 अगस्त 2015 को 7:24 am  

बहुत शानदार ,शानदार भावसंयोजन , आपको बहुत बधाई

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"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

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