अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

कुछ टुकड़े... यहाँ वहां से!


जब मन अव्यवस्थित हो... तो आसपास सब बिखरी वस्तुओं को समेटना चाहिए... धीरे धीरे यूँ शायद मन भी व्यवस्थित हो जाये... बस सहेजते व्यवस्थित करते घर को बीता पूरा समय ब्राह्म मुहूर्त से ही... क्या व्यवस्थित हुआ ये तो पता नहीं पर ये कुछ कतरनें मिलीं यहाँ वहां चुटके पूर्जे में आते जाते कभी की लिखी हुई तो सहेज लेते हैं यहाँ...



*** *** ***


बस तेरे दिल का
एक कोना हो...
जिसमें जगह मेरी
सुनिश्चित हो...


सारे अपने गम
मुझको सौंप कर तू...
सभी सर्द हवाओं से
सुरक्षित हो... ... ...


ये एक ही प्रार्थना
हम दोहराए जा रहे हैं
आँखों में जल है
और हम भावविभोर गाये जा रहे हैं...!


*** *** ***


अभाव से बड़ा है
अभाव के विरुद्ध संघर्ष...!

 

जितना हो सके दे हम
यत्र तत्र सर्वत्र
सहर्ष योगदान...


जीवन में
अदृश्य रस्तों से आता है हर्ष 


किसी को दो तो खिलती है होठों पे मुस्कान...!


*** *** ***

एक एक जुड़ कर
दो ही नहीं
ग्यारह भी होते हैं...


सोचिये जरा
हमारे आपके समर्थ होते

कैसे वो नयन भिंगोते हैं...?


उनके लिए नहीं...
अपने लिए हमें यह करना है...,


कल लहलहायें संभावनाएं

इसके लिए आज ही


स्वार्थ के कारागार से आज़ाद हो
कर्मपथ पर पग धरना है...!


*** *** ***



दोस्तों ने जो दीं बद दुआएं...
तो दुश्मन मेरे लिए
दुआ करने लगे...!


हर हाल में

सलामत रहे हम...

जीवन से भले कई बार गए ठगे...!


नमीं बची रही...
बचे रहे संकट तो बचे रहे आंसू भी...
कि आंसुओं के सदा से हैं हम सगे...!!



*** *** ***


10 टिप्पणियाँ:

कालीपद "प्रसाद" 11 मई 2015 को 5:02 am  

बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति !
A गज़ल्नुमा कविता (न पति देव न पत्नी देवी )

Anita 12 मई 2015 को 5:06 am  

सुंदर विचार मोती...ऐसे अश्रुओं की कद्र उसके ही द्वारे पर होती है..

मन के - मनके 12 मई 2015 को 3:38 pm  

कुछ टुकडे यहां वहां से,
मन को छूते.
एक-एक जुड कर ग्यारह होते हैं
अभाव से बडा,अभाव के विरुद्ध संघर्ष
जीवन में---
अदृश्य रास्तों से आता है हर्ष.

abhishek shukla 12 मई 2015 को 3:49 pm  

सुन्दर।

Madan Saxena 13 मई 2015 को 1:59 pm  

बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी ...बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!शुभकामनायें. कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

dj 14 मई 2015 को 2:10 pm  

सुन्दर प्रस्तुति आदरणीया

Onkar 16 मई 2015 को 2:11 pm  

सुन्दर रचना

ब्लॉग बुलेटिन 16 मई 2015 को 2:21 pm  

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, मैं रश्मि प्रभा ठान लेती हूँ कि प्राणप्रतिष्ठा होगी तो होगी , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Neeraj Kumar Neer 16 मई 2015 को 3:15 pm  

बहुत सुंदर प्रस्तुति

सुशील कुमार जोशी 16 मई 2015 को 3:25 pm  

बहुत सुंदर रचना ।

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कुछ बातें अनूठी है!
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मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
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इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
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