अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

कल ये हमारा नहीं रहेगा...!

तुम्हारे लिए ही

अस्त हो रहा है...

कल तुम्हारे लिए ही

पुनः उदित होगा...


बस रात भर रखना धैर्य

ये जो अँधेरा है न...

बीतते पहर के साथ

यही उजाला पुनीत होगा...


ये जो डूबती हुई

लग रही है न नैया...

रखना विश्वास,

किनारे लगेगी...


सोयी हुई जो

लग रही है न किस्मत...

वह तुम्हारे पुरुषार्थ से

निश्चित जगेगी...


अपने लिए जितने दुःख दर्द

लिखवा लाये हैं हम विधाता से...

वह सब हमें

परिमार्जित ही करेगा...


बीत रहा है हर क्षण जीवन

समय रहते समझें, इसका महत्व हम...

ये आज है...

कल ये हमारा नहीं रहेगा!!!

16 टिप्पणियाँ:

Anupama Tripathi 9 नवंबर 2013 को 12:18 pm  

आस से प्रज्ज्वलित सुंदर सार्थक रचना .....

रविकर 9 नवंबर 2013 को 12:34 pm  

सुन्दर प्रस्तुति-
शुभकामनायें आदरणीया

Onkar 9 नवंबर 2013 को 1:13 pm  

प्रेरक रचना

Reena Maurya 9 नवंबर 2013 को 4:26 pm  

नए विश्वास जगाती सार्थक भाव रचना...
:-)

Mukesh Pandey 9 नवंबर 2013 को 6:01 pm  

बीत रहा है हर क्षण जीवन
समय रहते समझें, इसका महत्व हम...
ये आज है...
कल ये हमारा नहीं रहेगा!!!

बहुत खूबसूरत। :)

निहार रंजन 9 नवंबर 2013 को 6:18 pm  

तभी तो इसी आज में अपना जीवन ढूँढना चाहिए. बहुत सुन्दर पंक्तियाँ.

Rachana 9 नवंबर 2013 को 7:10 pm  

बीत रहा है हर क्षण जीवन
समय रहते समझें, इसका महत्व हम...
ये आज है...
कल ये हमारा नहीं रहेगा!!!
sahi jo hai bas ye aaj hi hai
rachana

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 10 नवंबर 2013 को 2:57 am  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (10-11-2013) को सत्यमेव जयते’" (चर्चामंच : चर्चा अंक : 1425) पर भी होगी!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Anita 10 नवंबर 2013 को 5:40 am  

बीत रहा है हर क्षण जीवन
समय रहते समझें, इसका महत्व हम...
ये आज है...
कल ये हमारा नहीं रहेगा!!!

बहुत सुंदर...आज का पल ही हमारा है...

Pallavi saxena 10 नवंबर 2013 को 11:15 am  

सही ही तो है, यह आज है कल यह हमारा नहीं रहेगा।
इसलिए हर पल यहाँ जी भर जियो जो है यहाँ कल हो न हो...:)

Maheshwari kaneri 10 नवंबर 2013 को 3:07 pm  

बहुत सुन्दर पंक्तियाँ.

Annapurna Bajpai 10 नवंबर 2013 को 3:14 pm  

बहुत सुंदर भावों से सजी सुंदर रचना बधाई आपको ।

Vaanbhatt 10 नवंबर 2013 को 4:01 pm  

क्या बात है...

मन के - मनके 10 नवंबर 2013 को 4:21 pm  


अनुपमा जी,’कल ये हमारा नहीं रहेगा---
एक खूबसूरत सच,इस क्षन को भरपूर जीने
की आशा लिये---आपकी यह रचना.

मन के - मनके 10 नवंबर 2013 को 4:22 pm  

अनुपमा जी,’कल ये हमारा नहीं रहेगा---
एक खूबसूरत सच,इस क्षन को भरपूर जीने
की आशा लिये---आपकी यह रचना.

kavita pandya 11 जुलाई 2015 को 9:57 am  

आंसुओं के बीच आपकी रचना बहुत हिम्मत दे रही है...दिल से शुक्रिया

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