अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

कुछ कुछ साकार...!

घाव भर जाते हैं...
समय सब ठीक कर देता है...


जीवन में बस एक मन का रिश्ता हो
तो बदल सकती है दुनिया
इस कदर
कि खुद अपनी नज़र में
हम बदल जाते हैं...
बेहतर हो जाते हैं...
करने लगते हैं खुद से प्यार


जीवन और जिजीविषा जैसे शब्द
हो जाते हैं
कुछ कुछ साकार


झूठी मूठी सी इस दुनिया में
फिर एक कली सा
खिल आता है
स्नेह का संसार 


यादों के अमित अतल अनन्य
अनुपम हैं संस्कार 


दर्द भरे कुछ गीत हैं गुन गुन करते से
अगाध भावों के सान्निध्य से नम सुर संसार 


एक अनूठी शीतलता का भान
और उस क्षण की महिमा अकथ अपार 


जब... ... ...


जीवन और जिजीविषा जैसे शब्द
हो जाते हैं
कुछ कुछ साकार!

8 टिप्पणियाँ:

चला बिहारी ब्लॉगर बनने 24 नवंबर 2013 को 3:56 am  

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!!

Mukesh Pandey 25 नवंबर 2013 को 4:25 am  

जीवन में बस एक मन का रिश्ता हो
तो बदल सकती है दुनिया।
वाकई बहुत उम्दा।

Anupama Tripathi 25 नवंबर 2013 को 5:03 am  

सुकून देती रचना ....बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ....

अ-से अनुज 25 नवंबर 2013 को 5:42 am  

हुम्म !! मन ही बंधन .. मन ही संसार ..
मन जहाँ रम जाए ... वहीँ ले जीवन आकार !!

डॉ. मोनिका शर्मा 25 नवंबर 2013 को 7:08 am  

बेजोड़ भाव......

Archana 25 नवंबर 2013 को 10:24 am  

बहुत सुन्दर !

sushma 'आहुति' 25 नवंबर 2013 को 11:33 am  

बेहतरीन भाव ... बहुत सुंदर रचना प्रभावशाली प्रस्तुति

Shekhar Suman 25 नवंबर 2013 को 7:19 pm  

waah !!!

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग के बारे में

"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

ब्लॉग से जुड़िए!

कविताएँ