अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

मनें दीपावली... दीपों वाली!

स्वप्न में,
स्वप्न सा...
दीखता है जगमग
एक दीप उम्मीदों का
एक ज्योति खुशियों की 


स्वप्न के धरातल से
वास्तविकता की ठोस ज़मीन तक का सफ़र
इसी क्षण तय हो 

और दिखे दीप

जगमगाता
मन की देहरी पर 


बस इतनी सी ही
प्रार्थना है...

दीप का जलना मात्र जलना ही नहीं है
यह एक साधना है... 

विपरीत हवाओं के विरुद्ध

मौन संघर्ष...
जलती लौ की दिव्यता
विशुद्ध भावों का चरमोत्कर्ष... 


चलती रहे यात्रा अनंत
लौ को कोटि कोटि प्रणाम है
जीवन कुछ और नहीं
सत्य का संधान है !!!

***

मनें दीपावली... दीपों वाली!

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया !
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुख:भाग भवेत् !!

16 टिप्पणियाँ:

Mukesh Pandey 3 नवंबर 2013 को 8:09 am  

दीप का जलना मात्र जलना ही नहीं है
यह एक साधना है...
आपकी साधना सफल रही,
सुन्दर कृति :)
दीप सदा जलते रहें :)

दिगम्बर नासवा 3 नवंबर 2013 को 8:59 am  

भाव मय रचना ... दीप जलाना साधना हो जाए तो जीवन दीप सदेव जलता रहता है ...
दीपावली के पावन पर्व की बधाई ओर शुभकामनायें ...

Yashwant Yash 3 नवंबर 2013 को 9:28 am  

बेहतरीन कविता।

दीप पर्व आपको सपरिवार शुभ हो !

सादर

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 3 नवंबर 2013 को 10:32 am  

क्या बात! वाह! फिर आई दीवाली
आपको दीपावली की ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएं

Anupama Tripathi 3 नवंबर 2013 को 10:38 am  

जीवन कुछ और नहीं
सत्य का संधान है !!!
शुभ संदेश .....शुभ हो दीपावली ...!!

रविकर 3 नवंबर 2013 को 11:38 am  

पाव पाव दीपावली, शुभकामना अनेक |
वली-वलीमुख अवध में, सबके प्रभु तो एक |
सब के प्रभु तो एक, उन्हीं का चलता सिक्का |
कई पावली किन्तु, स्वयं को कहते इक्का |
जाओ उनसे चेत, बनो मत मूर्ख गावदी |
रविकर दिया सँदेश, मिठाई पाव पाव दी ||

वली-वलीमुख = राम जी / हनुमान जी
पावली=चवन्नी

गावदी = मूर्ख / अबोध

राजीव कुमार झा 3 नवंबर 2013 को 12:11 pm  

बहुत सुन्दर. दीपोत्सव की मंगलकामनाएँ !!
नई पोस्ट : कुछ भी पास नहीं है
नई पोस्ट : दीप एक : रंग अनेक

कालीपद प्रसाद 3 नवंबर 2013 को 12:20 pm  

सत्य का संधान .........
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं !
नई पोस्ट आओ हम दीवाली मनाएं!

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 3 नवंबर 2013 को 1:29 pm  

वाह! क्या बात है! फिर आई दीवाली
आपको दीपावली की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 3 नवंबर 2013 को 1:30 pm  

वाह! क्या बात है! फिर आई दीवाली
आपको दीपावली की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया 3 नवंबर 2013 को 3:41 pm  

भावपूर्ण प्रस्तुति !
दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाए...!
===========================
RECENT POST -: दीप जलायें .

डॉ. मोनिका शर्मा 3 नवंबर 2013 को 3:46 pm  

सुंदर भाव ....शुभकामनायें आपको भी

Onkar 4 नवंबर 2013 को 3:58 pm  

गहरी बात

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 5 नवंबर 2013 को 2:36 am  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज मंगलवार (05-11-2013) भइया तुम्हारी हो लम्बी उमर : चर्चामंच 1420 पर भी होगी!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
दीपावली के पंचपर्वों की शृंखला में
भइया दूज की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Pallavi saxena 6 नवंबर 2013 को 1:02 pm  

अनुपम भाव संयोजन से सजी सार्थक भावभिव्यक्ति ....

Vikesh Badola 6 नवंबर 2013 को 3:38 pm  

जीवन के जीव पक्ष को सकारात्‍मकता के साथ रखती। प्रकाश की उम्‍मीद में 'काश' की कामना। बहुत प्रकाशवान भाव हैं कविता के।

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कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
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