ये हमारा स्नेह है,
ये हमारी भावना है
जो किसी को
देवतुल्य समझ लेती है!
वरना इंसान का
इंसान होना ही
नामुमकिन सा है
इस दौर में
ये तो हमारी नादानी है
जो फिर भी
आधारहीन भावों में
उलझ लेती है!!
कुछ समय ही ऐसा होता है,
कि-
प्रतिकूलताएं एक संग
जुट जाती हैं!
एक एक कर तो
निपट लेता सबसे मन
पर ऐसा कहाँ होता है,
आती है
तो सारी विपत्तियां
आपस में गठबंधन कर,
एक ही साथ आती हैं!!
उज्जवल और स्याह
दोनों ही सच्चाइयों को
हम अपने जीवनकाल में
जीते हैं!
सब अच्छा अच्छा ही
कैसे होगा?
भाँती भाँती के लोग
हैं भाँती भाँती के 'सच' यहाँ
सुधा की आस में
जलते हैं... चलते हैं
और सारी राह हम गरल ही
पीते हैं!!
राहों में मिले कंटकों को
जो फूल बनाकर
स्मृतियों में बसा ले,
वह धैर्य क्यूँ मेरे पास नहीं?
इतना चलने पर भी न सीखा,
कब सीखेंगे?
कि रस्तों को रिश्तों का
मान नहीं दिया जाता
बहुत तोड़ते हैं रिश्ते,
कुछ इतना कि-
रहता है अपना आप ही
अपने पास नहीं!!
चलो, फिर भी
समेट कर सारी टूटन,
स्याह और सफ़ेद के बीच के
मिले जुले रंगों को निहारा जाए!
आप ही दिखेगी कोई किरण
अचानक से,
कुहांसे के बीच से चाँद
हल्का सा झांकेगा...
और, उस छवि के साथ
चलते हुए आज ही
कष्टकर स्मृतियों का बक्सा
धारा में बहाया जाए!!
अब कोई गीत नया गाया जाए...
अब कोई गीत नया गाया जाए...
उज्जवल, स्याह और उनके बीच के घुले मिले रंग!
प्रस्तुतकर्ता
अनुपमा पाठक
at
5 फ़रवरी 2012

18 टिप्पणियाँ:
स्याह और सफेद जीवन के बीच कुछ रंग भी उभरते हैं।
उन्हीं की तलाश की जाए।
कुछ समय ही ऐसा होता है,
कि-
प्रतिकुलताएं एक संग
जुट जाती हैं!
एक एक कर तो
निपट लेता सबसे मन
पर ऐसा कहाँ होता है,
आती है
तो सारी विपत्तियां
आपस में गठबंधन कर,
एक ही साथ आती हैं!!
जीवन को साक्षी वस्तुपरक भाव देखती रचना सच्चाइयों को आँजती झेलती आगे बढ़ने की ताकत देती .कृपया -'प्रतिकूलताएं' कर लें .
@veerubhai,
सुधार कर लिया, धन्यवाद!
सादर!
ये हमारा स्नेह है,
ये हमारी भावना है
जो किसी को
देवतुल्य समझ लेती है!
वरना इंसान का
इंसान होना ही
नामुमकिन सा है... बिल्कुल सच
अचानक से,
कुहांसे के बीच से चाँद
हल्का सा झांकेगा...
और, उस छवि के साथ
चलते हुए आज ही
कष्टकर स्मृतियों का बक्सा
धारा में बहाया जाए!!
बहुत सुंदर भाव । सुंदर प्रस्तुति
बहुत ही बढ़िया
सादर
स्याह और सफ़ेद के बीच के
मिले जुले रंगों को निहारा जाए!..
बहुत बढ़िया विचार...
सुन्दर प्रस्तुति.
आपकी अभिव्यक्ति नायाब होती है... आपके विषय अनोखे और अनछुए होते हैं.. और आपकी कविता ह्रदय से निकलती है!!
बहुत सुंदर भाव..सार गर्भित |
और, उस छवि के साथ
चलते हुए आज ही
कष्टकर स्मृतियों का बक्सा
धारा में बहाया जाए!!
....बहुत सारगर्भित लाज़वाब अभिव्यक्ति...
Very well written. Beautiful
वाह सुंदर सकारात्मक रचना
राहों में मिले कंटकों को
जो फूल बनाकर
स्मृतियों में बसा ले,
वह धैर्य क्यूँ मेरे पास नहीं?
बहुत ही सुन्दर रचना!
बहुत सारगर्भित लाज़वाब अभिव्यक्ति|
बहुत सुन्दर प्रस्तुति
आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 06-02-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ
वाह!!!!!बहुत सुंदर सार भाव की प्रस्तुति ,अच्छी रचना लगी
NEW POST....
...काव्यान्जलि ...: बोतल का दूध...
...फुहार....: कितने हसीन है आप.....
सुन्दर भावो की सुन्दर प्रस्तुति...
हैं भाँती भाँती के 'सच' यहाँ
सुधा की आस में
जलते हैं... चलते हैं
और सारी राह हम गरल ही
पीते हैं!!bahut hi sundar rachana yathrth samvedana
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