अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

लोग समय के साथ बदल जाते हैं...!

कुछ एक ऐसे विम्बों को याद करते हुए जो वक़्त के साथ बदल गए कुछ इस तरह कि विश्वास की जड़ें हिल गयी... आहत मन से लिखी एक पुरानी कविता स्वयं को ही सांत्वना देने के लिए सहेज लेते हैं यहाँ...!

लोग समय के साथ बदल जाते हैं
इतना, कि-
ये यकीन कर पाना भी
नामुमकिन सा लगता है
कि एक समय रहा होगा
जब खूब बनी होगी,
किसी मोड़ पर तब
उलझन नहीं रही होगी!
कितनी कविताओं में
प्रेरणा बन मुस्कुराया होगा,
ये बदली सी वही बहार है
जिसने इतना रुलाया होगा!

यकीन हो न हो
पर ऐसा ही अक्सर होता है
जीवन तो हर रूप में
कोई न कोई धोखा है
और धोखा भी ऐसा कि-
आप झटक नहीं सकते
एक पराये निर्जीव वस्तु की तरह
पटक नहीं सकते
क्यूंकि अपने पतन की ओर
बढ़ने से पहले
वह आपके भीतर पैठ चुका होता है
जितना उसका दोष
उतना ही दोष आपके चयन का होता है

लेकिन,
इसका यह अर्थ नहीं
कि बाहें सिमट जायेंगी
आज भी बाहें फैलाये उमंगें खड़ी हैं
जिन्हें आना है आओ,
एक बार छलने का अवसर तुम्हारे पास सुरक्षित है
क्या होगा,
अधिक से अधिक
एक बार और विश्वास की सिरायें हिल जायेंगी...?

पर, फिर भी निश्चिंत रहो
समेट लेंगे हम अपने टूटे विश्वास को,
सिद्धांत वही रहेगा
सबका स्वागत है...
इस आँगन में सब आ सकते हैं
यहाँ का समीर सबके लिए एक सा बहेगा!

बस कुछ एक
नाज़ुक सी बातों का
एहसास रहे...
जिनका मान हमें है,
ऐसे कुछ यादों के सूखे पत्ते
तेरे भी पास रहे!!!

19 टिप्पणियाँ:

Travel Trade Service 24 फ़रवरी 2012 को 4:00 pm  

समेट लेंगे हम अपने टूटे विश्वास को,
सिद्धांत वही रहेगा
सबका स्वागत है...
इस आँगन में सब आ सकते हैं
यहाँ का समीर सबके लिए एक सा बहेगा!..........वाह !!!!सही में इस तरह की साहसी गिरह को ...खोलना ..जीवन की जीने की कला में से एक है ...विशाल दिल की पहचान ...उसी में अमृत और विष भी !!!!!!बस जरा सा मंथन साथ मिल कर कर लें !!!!!!!!पर पर जिस को जो मिला अपनी कर्म योनी से !!!!!!!सुन्दर विवाचन !!!!!!nirmal

Rajesh Kumari 24 फ़रवरी 2012 को 4:05 pm  

bhaavnaon ka pravaah addbhut ...bahut sundar.

महेन्द्र श्रीवास्तव 24 फ़रवरी 2012 को 4:21 pm  

क्या कहने
बहुत सुंदर

G.N.SHAW 24 फ़रवरी 2012 को 4:30 pm  

सुन्दर भावाभिव्यक्ति ! गरिमामय ! बधाई

Kailash Sharma 24 फ़रवरी 2012 को 4:37 pm  

बस कुछ एक
नाज़ुक सी बातों का
एहसास रहे...
जिनका मान हमें है,
ऐसे कुछ यादों के सूखे पत्ते
तेरे भी पास रहे!!!

....बहुत सुंदर और सटीक भाव...

abhienow 24 फ़रवरी 2012 को 5:57 pm  

यकीन हो न हो
पर ऐसा ही अक्सर होता है
जीवन तो हर रूप में
कोई न कोई धोखा है
और धोखा भी ऐसा कि-
आप झटक नहीं सकते
एक पराये निर्जीव वस्तु की तरह
पटक नहीं सकते!!!

एक ऐसा भाव, जो सभों को पुर्णतः अवगत होते हुए भी अनजाना सा लगे .....

relyrics.blogspot.in/2012/02/mango-people.html

Swarajya karun 24 फ़रवरी 2012 को 6:32 pm  

लोग समय के साथ बदल जाते हैं या समय लोगों के साथ बदल जाता है , यह कहना आज के समय में मुश्किल है .बहरहाल आपकी यह कविता मुझे मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण लगी .आभार.

संगीता स्वरुप ( गीत ) 24 फ़रवरी 2012 को 6:44 pm  

बस कुछ एक
नाज़ुक सी बातों का
एहसास रहे...
जिनका मान हमें है,
ऐसे कुछ यादों के सूखे पत्ते
तेरे भी पास रहे!!!


बहुत सुंदर ...

vasundhara pandey 24 फ़रवरी 2012 को 6:46 pm  

ऐसा ही अक्सर होता है
जीवन तो हर रूप में
कोई न कोई धोखा है
और धोखा भी ऐसा कि-
आप झटक नहीं सकते
एक पराये निर्जीव वस्तु की तरह
पटक नहीं सकते
क्यूंकि अपने पतन की ओर
बढ़ने से पहले
वह आपके भीतर पैठ चुका होता है
जितना उसका दोष
उतना ही दोष आपके चयन का होता है ...bahut sundar aur sach... !!

पत्रकार-अख्तर खान "अकेला" 25 फ़रवरी 2012 को 3:44 am  

anupma bahan likhti rahe likhte rahen badhaai ho

sangita 25 फ़रवरी 2012 को 12:01 pm  

सुन्दर विवाचन par log to nahin han samay jroor badal jata hae shayad.

Anupama Tripathi 25 फ़रवरी 2012 को 12:02 pm  

bahut sunder bhav ...

प्रवीण पाण्डेय 25 फ़रवरी 2012 को 1:46 pm  

स्मृतियाँ खालिस रहती, हर दिन ताजी..

Anita 25 फ़रवरी 2012 को 1:50 pm  

बहुत साहसिक कविता...एक खालिस दिल से निकली हुई...

Yashwant Mehta "Yash" 26 फ़रवरी 2012 को 8:26 am  

लोग बदल जातें हैं और हम भी बदल जातें हैं!! यादें तो सबके सीने में जिन्दा रहती हैं.......कुछ लोग यादों से रोज मिलते हैं और कुछ लोगो को यादों से मिलने की फुर्सत ही नही मिलती और कुछ मिलना ही नही चाहते

प्रेम सरोवर 26 फ़रवरी 2012 को 1:32 pm  

बहुत सुंदर प्रस्तुति । Welcome to my New Post.

तू सवेरा ज़ुदा है माँ 26 फ़रवरी 2012 को 1:58 pm  

wah..bahut sundar

abhi 26 फ़रवरी 2012 को 5:41 pm  

बिलकुल..मुझे तो बड़ा इक्स्पिरिएंस हैं इस तरह का..
सही मानिए बड़ा दुःख होता है जब कोई ऐसा जो कभी आपके बेहद करीब था वो समय के साथ साथ बिलकुल बदल जाए और उससे आपका संपर्क हमेशा के लिए खत्म हो जाए.
एक ऐसा ही मित्र, जिससे पहले बहुत गहरी दोस्ती थी, लेकिन कुछ कारणवश वो मेरे से अलग हो गया(क्यों, ये मुझे भी पता नहीं), उससे आज शाम मुद्दतों बाद फोन पर बातचीत हुई...मुझे अच्छा लगा!

अनुपमा पाठक 26 फ़रवरी 2012 को 5:51 pm  

@abhi,
That's Great:)
Happy for you:))

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