अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

एक अनदेखा क्षण!

जीवन चलता रहता है
और किसी क्षण चुपके से...
साँसे थम जाती हैं!
मृत्यु की ख़ामोशी में
जिंदगी की उलझनें...
पीछे रह जाती हैं!

केवल यादें छोड़ जाते हैं
जाने वाले
लौट कर नहीं आते हैं
मृत्यु छीन लेती है
जितने भी
जग से रिश्ते नाते हैं

जन्म मृत्यु के क्रम की
जाने है रहस्यमयी सच्चाई क्या...
आखें नम हो जाती हैं!
जीवन चलता रहता है
और किसी क्षण चुपके से...
साँसे थम जाती हैं!

कविता कोश स्थापना दिवस पर...

कविता कोश स्थापना दिवस पर संस्थापक एवं कविता कोश परिवार से जुड़े सभी स्नेहीजनों को हार्दिक शुभकामनायें...

पुनीत कल्पना का साकार स्वरुप
पुष्पित पल्लवित होता रहे निरंतर!
संचय का अद्वितीय कीर्तिमान यह
पावन करता रहे मन प्राण अंतर!

संस्थापक की दूरदर्शिता प्रणम्य है
स्थापित किया प्रतिमान यह सुंदर!
साहित्य संकलन के वृहद क्षेत्र में
कविता कोश एक ज्वलंत हस्ताक्षर!

यात्रा के भिन्न पड़ावों को पार कर
ऊँचाईयों तक पहुंची है यह धरोहर!
पुरातन और नूतन काव्य लहरों का
कविता कोश अद्भुत अथाह एक सागर!

पुनीत कल्पना का साकार स्वरुप
पुष्पित पल्लवित होता रहे निरंतर!
संचय का अद्वितीय कीर्तिमान यह
पावन करता रहे मन प्राण अंतर!

दीया जलाना हम भूल गए!

व्यस्तताओं के बीच
अपनों से मिलना भूल गए!
जीवन चलता ही रहा
बस जीना हम भूल गए!

धुंधली सी आँखें
कुछ भी देख नहीं पाईं
वीरान अँधेरे में
दीया जलाना हम भूल गए!

ये कैसी दौड़ में
लिप्त है इंसान
जाने कब इंसानियत का
नाम ठिकाना हम भूल गए!

नए नए कीर्तिमान गढ़
होते रहे आनंदित
और अपनी ही धरती का
साथ निभाना हम भूल गए!

बदले यह मौसम
हो सत्य की प्राण प्रतिष्ठा
ऐसे कैसे हुआ अनर्थ
सरलता के गुण गाना हम भूल गए!

व्यस्तताओं के बीच
अपनों से मिलना भूल गए!
जीवन चलता ही रहा
बस जीना हम भूल गए!

इस ब्लॉग के बारे में

"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

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