अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

रचनात्मक गति साक्षात आराध्य है....

बिना किसी जोड़-घटाओ या कृत्रिम साज संवार के..
जो अभिव्यक्त हो , वो काव्य है !
नियमावलियों से गणित चलता है..
रचनात्मकता कहाँ इन परिधियों को प्राप्य है !

मानसिक यात्राओं की यंत्रणाएँ झेलने का साहस हो,तो-
कठिन पड़ावों की सकल विडम्बनायें स्वयं श्रमसाध्य हैं !
लिखती हुई कलम क्या जाने..
विम्बों को जोड़ती उसकी गति साक्षात आराध्य है !
चल पड़ती है तरंगें विचार गंगा की..
जिसे सहेजने को इस अकिंचन की लेखनी बाध्य है !

बिना किसी जोड़-घटाओ या कृत्रिम साज संवार के..
जो अभिव्यक्त हो , वो काव्य है !
नियमावलियों से गणित चलता है..
रचनात्मकता कहाँ इन परिधियों को प्राप्य है !

5 टिप्पणियाँ:

बेनामी 19 सितंबर 2010 को 2:55 pm  

बकवास कविता

मनोज कुमार 19 सितंबर 2010 को 6:29 pm  

कविता अभिधेयात्मक एवं व्यंजनात्मक शक्तियों को लिए हुए है।

बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!

काव्य के हेतु (कारण अथवा साधन), परशुराम राय, द्वारा “मनोज” पर, पढिए!

वन्दना 20 सितंबर 2010 को 6:36 am  

बेहतरीन अभिव्यक्ति।
आपकी पोस्ट आज के चर्चामंच का आकर्षण बनी है । चर्चामंच पर आकर अपने विचारों से अवगत करायें।
http://charchamanch.blogspot.com

वाणी गीत 21 सितंबर 2010 को 5:04 am  

नियमावलियों से गणित चलता है..
रचनात्मकता कहाँ इन परिधियों को प्राप्य है !
और क्या ...

kuch aisa hi मैंने लिखा था ..." मेरी कविता उसकी कविता " में ..!

यशवन्त माथुर 22 दिसंबर 2012 को 8:31 am  


दिनांक 23/12/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
धन्यवाद!

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