अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

गुरु कृपा की छाँव में!

गुरु कृपा की छाँव में
कोई काँटा चुभता ही नहीं पाँव में!
लक्ष्य साधने की राह में,
शुरू होती है यात्रा श्रद्धा की थाह में!

सिद्धांतों की रौशनी... सत्कर्मों के दीप,
जीवन की संध्या हर घड़ी आ रही समीप!

इससे पहले कि दिन ढ़ले,
हम राह के काँटे समेटते चले,
फिर शिक्षा हो सार्थक,
गुरु कृपा से बनें पथ प्रदर्शक!

राह दिखाने वाली दृष्टि
सर्वथा पूज्य हो,
प्रभुकृपा होती है तभी
जब गुरुकृपा से परिपूर्ण जीवन स्तुत्य हो!

अध्ययन-अध्यापन की
गौरवशाली परंपरा के स्तम्भ हों,
जीवन की पाठशाला के विद्यार्थियों में
लेशमात्र भी न दंभ हो!

यहाँ सीखने सीखाने की
परिपाटी हो
निर्माण हेतु मिले जो,
वो निर्मल स्वच्छ माटी हो!

गुरु का समुचित आदर हो
हमारे भीतर सदैव एक जागरूक विद्यार्थी सादर हो

ये लगन ही उच्च स्थान दिलाती है,
अद्भुत रूपों में गुरुकृपा फलित हो जाती है!

और प्रताप ऐसा, कि...
खिल जाती हैं सुवासित कलियाँ-
मन के भोले भाले गाँव में;
गुरु कृपा की छाँव में
कोई काँटा चुभता ही नहीं पाँव में!!

8 टिप्पणियाँ:

संगीता स्वरुप ( गीत ) 5 सितंबर 2010 को 8:50 am  

सुन्दर अभिव्यक्ति

anupama 5 सितंबर 2010 को 8:51 am  

dhanyavad sangeeta ji!
shikshak diwas par aapko dher sari subhkamnayen.....
regards,

C. P. Sharma 5 सितंबर 2010 को 1:57 pm  

गुरु कृपा की छाँव में निर्मल मन धरा. शुभ कामनाएं.

anupama 5 सितंबर 2010 को 3:11 pm  

thanks!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (ਦਰ. ਰੂਪ ਚੰਦ੍ਰ ਸ਼ਾਸਤਰੀ “ਮਯੰਕ”) 5 सितंबर 2010 को 6:49 pm  

भारत के पूर्व राष्ट्रपति
डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म-दिन
शिक्षकदिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

anupama 6 सितंबर 2010 को 7:39 am  

Best wishes to u too, shastri ji!

शारदा अरोरा 6 सितंबर 2010 को 9:34 am  

एक व्यवस्थित से दृष्टिकोण से सजी आपकी सोच ...मेरे ब्लॉग पर प्यारी सी टिप्पणी के लिये धन्यवाद ।

anupama 6 सितंबर 2010 को 12:24 pm  

my pleasure...
u rightly deserve all praise for ur creativity,sharda ji!!!!

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