अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

नियति और इंसान

नियति जो निर्धारित करे .... हमे वह सब सहना ही होता है .... हंस कर या रो कर ! मगर ऐसे में मेरा मन अनायास उस चेतन शक्ति को प्रणाम करता है जो घोर निराशा में भी जीवन जीने के बहाने तलाश लेती है... मृत्यु की मरूभूमि के आगे भी जीवन चलायमान होता है....

शब्दों के लिए जगह न हो
संभव है एक ऐसा भी दौर आये...
अभी तो कितनी ही बातें हैं -
कितनी ही कहानी है!

रहस्य
बादलों के पार ही नहीं होता...
भावनाओं का संसार भी -
इन तत्वों का मानी है!

बंद आँखों से
महसूस की जाये...
हृदय पर कुछ अदृश्य से -
आकारों की जो निशानी है!

अनचिन्ही... अनजानी सी
नियति है...
नम आँखों में ..जरा सी हंसी -
यही तो जिंदगानी है !

अच्छा ही रहेगा सफ़र
खिलखिलाने के कई बहाने जो हैं...
आँखों में कितनी ही -
छोटी छोटी खुशियों का पानी है!

17 टिप्पणियाँ:

बेनामी 11 अगस्त 2010 को 8:34 am  

अनचिन्ही... अनजानी सी
नियति है...
नम आँखों में ..जरा सी हंसी -
यही तो जिंदगानी है !

zoft.in 11 अगस्त 2010 को 4:22 pm  

kripa sabse apaar hai, niyati se bhi

राकेश कौशिक 11 अगस्त 2010 को 4:22 pm  

सुंदर शब्दों के माध्यम से सच्चे और अच्छे विचार - प्रशंसनीय रचना

sanu shukla 11 अगस्त 2010 को 5:09 pm  

sundar....!

Patali-The-Village 11 अगस्त 2010 को 10:31 pm  

sundar kavita hai.

Dr.J.P.Tiwari 12 अगस्त 2010 को 3:57 am  

ek sundar bhaw liyeachchhi kavita . swagat hai.

DR.MANOJ 12 अगस्त 2010 को 4:25 am  

**
कहते हैं पिछले जन्म का इस जन्म में भुगतता है जीवन
फ़िर इस जन्म का भुगतना , कब सुख पायेगा जीवन ?
मन का धोखा या सब्र का एक ओट,
जीने की विवशता ,पर मुनासिब भी तो नही अंत |
कुछ सिक्कों की खनक में खोया बचपन ,
फ़िर भी शांत जैसे यही नसीब |
जीवित हैं , जीना है ,
नियति है , खुदा का रहम है |


बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई. ढेर सारी शुभकामना......

'राधे राधे'
"जय हिंद ,जय हिंदी”

harishjharia 12 अगस्त 2010 को 2:35 pm  

नए हिंदी ब्लाग के लिए बधाइयाँ और स्वागत। उत्तम लेखन है… लिखते रहिए। अन्य ब्लागोँ पर भी जाइए जिनमें मेरे ब्लाग भी हैं…

आनन्‍द पाण्‍डेय 12 अगस्त 2010 को 5:07 pm  

ब्‍लाग जगत पर संस्‍कृत की कक्ष्‍या चल रही है ।

आप भी सादर आमंत्रित हैं,
http://sanskrit-jeevan.blogspot.com/ पर आकर हमारा मार्गदर्शन करें व अपने सुझाव दें, और अगर हमारा प्रयास पसंद आये तो हमारे फालोअर बनकर संस्‍कृत के प्रसार में अपना योगदान दें ।
धन्‍यवाद

Nityanand Gayen 13 अगस्त 2010 को 4:44 am  

Nice thougth , liked it.

nityanand 13 अगस्त 2010 को 4:46 am  

bahut sundar

anupama 13 अगस्त 2010 को 11:57 am  

धन्यवाद !

अजय कुमार 21 अगस्त 2010 को 8:29 am  

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

sada 21 अगस्त 2010 को 9:11 am  

अच्छा ही रहेगा सफ़र
खिलखिलाने के कई बहाने जो हैं...
आँखों में कितनी ही -
छोटी छोटी खुशियों का पानी है!
बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द रचना ।

संगीता पुरी 21 अगस्त 2010 को 3:05 pm  

इस नए सुंदर चिट्ठे के साथ आपका ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

anupama 29 अगस्त 2010 को 6:48 pm  

dhanyavad aap sabon ka shabdashish hetu!
@ajay ji...
likhna ya anya blog ko padhna...
ya phir comment karna kashtkar kaise ho sakta hai!
sorry for not being so active in commenting... but i do read avidly!
most of the times write-up leaves u mesmerised!
moreover, i believe , silence is the most flattering of praises!!!!
regards,

Madhuresh 9 जुलाई 2013 को 4:28 am  

सुन्दर और प्रेरक.

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग के बारे में

"कुछ बातें हैं तर्क से परे...
कुछ बातें अनूठी है!
आज कैसे
अनायास आ गयी
मेरे आँगन में...
अरे! एक युग बीता...
कविता तो मुझसे रूठी है!!"

इन्हीं रूठी कविताओं का अनायास प्रकट हो आना,
"
अनुशील...एक अनुपम यात्रा" को शुरुआत दे गया!

ब्लॉग से जुड़िए!

कविताएँ