अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

अगले मोड़ तक हमारा साथ अभी बाक़ी है...!

कई बातों की
बात अभी बाक़ी है...
कुछ पहर शेष है,
रात अभी बाक़ी है...


पर रात बीतेगी, उसे बीतना ही होगा...
अहले सुबह की शुरुआत अभी बाक़ी है...


हर तरफ
हौसलों के टूटने का
दौर ही अगर चल पड़ा है...
तो टूटने को तो पूरी ज़मात अभी बाक़ी है...


अंधकार को विदा होना ही होगा...
मेरी आँखों में सपनो की बारात अभी बाक़ी है...


क्यूँ करते हो
अभी से जाने की बातें...
अगले मोड़ तक
हमारा साथ अभी बाक़ी है...


कई बातों की
बात अभी बाक़ी है...
कुछ पहर शेष है,
रात अभी बाक़ी है...


पर रात बीतेगी, उसे बीतना ही होगा...
अहले सुबह की शुरुआत अभी बाक़ी है...!!

13 टिप्पणियाँ:

nirmal gupt 28 अगस्त 2010 को 8:56 am  

अंधकार को विदा होना ही होगा ..
मेरी आँखों में सपनो की बारात अभी बाक़ी है ..
अंधकार का मिटना तय है.खूबसूरत कविता

संगीता स्वरुप ( गीत ) 28 अगस्त 2010 को 9:50 am  

क्यूँ करते हो अभी से जाने की बातें ..
अगले मोड़ तक हमारा साथ अभी बाक़ी है ..

बहुत सुन्दर ...सकारात्मक सोच के साथ लिखी सुन्दर कविता ..

वन्दना 28 अगस्त 2010 को 2:48 pm  

हर तरफ हौसलों के टूटने का दौर ही अगर चल पड़ा है ...
तो टूटने को तो पूरी ज़मात अभी बाक़ी है ..

अंधकार को विदा होना ही होगा ..
मेरी आँखों में सपनो की बारात अभी बाक़ी है ..

वाह्………………क्या बात कह दी…………बस कुछ ना कुछ बाकी होना चाहिये फिर मंज़िलें दूर नही।

संगीता स्वरुप ( गीत ) 28 अगस्त 2010 को 9:11 pm  

आपकी पोस्ट रविवार २९ -०८ -२०१० को चर्चा मंच पर है ....वहाँ आपका स्वागत है ..

http://charchamanch.blogspot.com/

वाणी गीत 29 अगस्त 2010 को 3:55 am  

क्यूँ करते हो अभी से जाने की बातें ..
अगले मोड़ तक हमारा साथ अभी बाक़ी है ..
यही आस हौसला बनाये रखती है ...कुछ कदम का ही हो साथ या कुछ समय बाद ...साथ होने की आस चलते रहने और नए सूरज नयी किरण की उमंग बनाये रखती है / बनाये रखे ...!

राणा प्रताप सिंह (Rana Pratap Singh) 29 अगस्त 2010 को 5:49 am  

बहुत सुन्दर कविता| सकारात्मक सोच से युक्त...हौसला साथ रहे तो हर चीज मुकम्मिल हो जाएगी|

संगीता स्वरुप ( गीत ) 4 जनवरी 2012 को 6:52 pm  

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 29 -12 - 2011 को यहाँ भी है

...नयी पुरानी हलचल में आज... अगले मोड तक साथ हमारा अभी बाकी है

vidya 5 जनवरी 2012 को 3:54 am  

बहुत सुन्दर अनुपमा जी ....

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) 5 जनवरी 2012 को 8:45 am  

अंधकार को विदा होना ही होगा ..
मेरी आँखों में सपनो की बारात अभी बाक़ी है ..

बेहतरीन पंक्तियाँ।

सादर

Mamta Bajpai 5 जनवरी 2012 को 1:06 pm  

खूबसूरत है

Pallavi 5 जनवरी 2012 को 6:06 pm  

जीवन जीने के लिए कुछ न कुछ बाकी होना ही चाहिए। क्यूंकि picthure अभी बाकी है मेरे दोस्त :)

दिलीप 5 जनवरी 2012 को 10:30 pm  

kya baat hai...bahut khoob...

Reena Maurya 6 जनवरी 2012 को 6:24 pm  

हर बात में कुछ बात बाकि है...अगले मोड़ तक साथ बाकि है...बहुत ही सुन्दर रचना है...

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कुछ बातें अनूठी है!
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