अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

शब्द रचे कुछ सस्वर!

कृष्ण भक्ति की धारा में
शब्द रचे कुछ सस्वर!
जीवन की क्या बिसात
ये माटी तो है नश्वर!!

एक एक मोती पिरोकर
एक माला भावों वाली!
हमने भी मुरलीवाले के चरणों में
अर्पित कर डाली!!

सकल काँटों को कर विस्मृत
पुष्प का तेज हुआ प्रखर!
प्रभु गुण के गान से
धन्य हुए अधर!!

ऐसी ही बातें हो
मधुरता हो बांसुरी वाली!
भक्ति भाव के पुष्पों से
लहलहाए डाली डाली!!

स्वार्थ के कारागार से
आत्मा मुक्त हो इसी पहर!
आज से कलुषता विलुप्त हो जाये
ऐसी चले लहर!!

राधा-मीरा सा प्रेम
भक्ति चैतन्य महाप्रभु वाली!
भाव सुधा का प्याला औ'
झूमती हुई हृदयकुञ्ज की हर डाली!!

ऐसा अद्भुत हो वातावरण
तो कालचक्र भी जाये ठहर!
कृष्ण भक्ति की धारा में
शब्द रचे कुछ सस्वर!!

14 टिप्पणियाँ:

माधव 1 सितंबर 2010 को 8:42 am  

nice

ana 1 सितंबर 2010 को 8:45 am  

ye krishnabhaktimaya kavita bhaavvibhor kar dene waali hai

Travel Trade Service 1 सितंबर 2010 को 8:46 am  

pura Krishanmay ho gai hai aap and padne wale ko bhe kardeya hai Krishnamay ...Thanks

कौशल तिवारी 'मयूख' 1 सितंबर 2010 को 8:54 am  

श्रीकृष्णजन्माष्टमी की बधाई .
जय श्री कृष्ण

संगीता स्वरुप ( गीत ) 1 सितंबर 2010 को 9:04 am  

बहुत सुन्दर भावों से सजी रचना ..


कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनायें

anju 1 सितंबर 2010 को 9:43 am  

स्वार्थ के कारागार से
आत्मा मुक्त हो इसी प्रहर ......
बहुत खूब अनुपमा .... येही प्रेम ही जनमाष्टमी हे क्योंकि प्रेम ही ईश्वर हे .....ईश्वर ही प्रेम हे ....

Aparna Manoj 1 सितंबर 2010 को 12:20 pm  

sundar bhavon se gunthi kavita-maala! krishnmay karti kavita anu:))

Rakesh 1 सितंबर 2010 को 1:52 pm  

ऐसा अद्भुत हो वातावरण
तो कालचक्र भी जाये ठहर !
wakai anupama
aap sahi kehte hasi
aur sachi bhavna ko aapne sahaj sabdo se kavya mein badla hai .....aapke khyalon ke anurup hum es viswa ko anokha banane mein saksham ho sakte hai .....
janmashtmi per aapko hardik badhai

Krishna Dhandhania 1 सितंबर 2010 को 2:15 pm  

Bahut sundar bhav purna aur bhakti poorak rachna hai...Antas Bhav vibhor ho jaata hai.....Janmashtami ki tunhe bhi badhai....Krishna

राकेश पाठक 1 सितंबर 2010 को 2:21 pm  

बहुत ही बढ़िया अनु ,इसी तरह भाव पथ की रौशनी बनी रहो तुमसब को कृष्ण भगवान के इस पावन जन्मोत्सव पर ढेर सारी शुभकामनायें ...........
कृष्ण पधारे हर घर में
खुशियों के अनमोल धरोहर लेकर
रास- रंग का उत्सव हो जीवन में
सबके मन में बसे कृष्ण मनोहर ....

Dr.J.P.Tiwari 1 सितंबर 2010 को 2:59 pm  

बहुत सुन्दर

Navin C. Chaturvedi 1 सितंबर 2010 को 3:49 pm  

wow

स्वार्थ के कारागार से
आत्मा मुक्त हो इसी पहर !
आज से कलुषता विलुप्त हो जाये...
ऐसी चले लहर !!

Udan Tashtari 1 सितंबर 2010 को 3:54 pm  

बहुत सुन्दर..

श्रीकृष्णजन्माष्टमी की बधाई .

C. P. Sharma 4 सितंबर 2010 को 4:18 am  

अनुपमा जी, अनुपम रचना,

क्या काल चक्र?
क्या कष्ट काय ?
कृष्ण की अनंतता कही न जाय,
उसके भावों में तो बह कर
भक्तों के सारे दुःख बह जाय.
भक्ति तो एक निरंतर सरिता
एक बूंद को सागर से दे मिलाय,
फिर चले सदा ही काव्य नाद
अनुपम संगीत इसी में है,
की और गान में सुर खो जाये
सारे सही सुर क्रिशन के गीत में हैं.

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