अनुशील

...एक अनुपम यात्रा

संकल्प:इस पावन पर्व पर...

भारत माता मंदिर में
एकांत अकेले बैठे हुए
दीवारों पर अंकित
"वन्दे मातरम" गीत
कागज़ पर उतारना याद आता है ....!
विद्यालय में पंद्रह अगस्त
के पूर्व का उत्साह
कार्यक्रम-गीत-भाषण
और अंत में वितरित होने वाला
चाकलेट याद आता है ....!

* * *

हमने तो सिर्फ कहानियां सुनी हैं

वतन पर कुर्बान हो जाने वाले

क्रांतिवीरों के शौर्य को

नाटकों में ही मंचों पर मंचित होते देखा है

क्या आज पुनः नहीं चाहिए

एक अदद क्रांति -

विचारों में... व्यवस्था में... संपूर्ण तंत्र में ?

क्या आज पुनः नहीं चाहिए वही

सर पर कफ़न बांधने वाला साहस ?

"स्व" के संकुचित धरातल से ऊपर उठ कर

राष्ट्रहित के लिए सोचने वाली निष्ठा ?

उत्तर निःसंदेह

स्पष्ट " हाँ " ही है ...

फिर ये आलस्य पूर्ण पहर क्यूँ ?

फिर ये एक दूसरे की ओर नज़र क्यूँ ?

छोटे ही से स्तर से सही ..

स्वयं परिवर्तन और प्रयास की-

एक कड़ी बने!

शुरुवात तो हो... लड़खड़ाते क़दमों के लिए-

ही छड़ी बने!!

स्वतंत्रता की मर्यादा का

निर्वहन हो!

दौड़ पड़ें भीड़ एक आवाज़ पे....

ऐसे सच्चा आवाहन हो!!

पुकारती है माटी -

पावन पर्व मनाएँ!

आज़ादी के ६३ सालों -

की अनूठी गाथा गाएँ!!

नमन करें उन वीरों को

जिनके बलिदान ने हमे ये युग दिया है!

उस भावना को करें ग्रहण

जिसने त्याग का अनुपम व्रत लिया है!!

अपरिग्रह का सिद्धांत-

पालित हो ... पोषित हो!

समाजहित और राष्ट्रहित में हो तो...

सर्वस्व भी तिरोहित हो!!

यही संकल्प हो -

इस पावन पर्व पर !

इस मिट्टी की संतान है तू ....

इस बात पर गर्व कर !!



जय हिंद !

3 टिप्पणियाँ:

Sunil Kumar 14 अगस्त 2010 को 3:57 pm  

फिर ये आलस्य पूर्ण पहर क्यूँ ?
फिर ये एक दूसरे की ओर नज़र क्यूँ ?
छोटे ही से स्तर से सही ..
स्वयं परिवर्तन और प्रयास की-
एक कड़ी बने! सार्थक पोस्ट बहुत बहुत बधाई

महेन्द्र मिश्र 14 अगस्त 2010 को 4:09 pm  

बढ़िया रचना ...
स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं.

anupama 14 अगस्त 2010 को 4:26 pm  

thanks sunil ji and mahendra ji:)
swatantrata diwas ke pawan awsar par subhkamnayen!

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